संवाद न्यूज एजेंसी
रोसयाबाजार। बाबा कंकडेश्वर नाथ परिसर में चल रहे गायत्री महायज्ञ में बृहस्पतिवार को प्रिया किशोरी ने संगीतमयी कथा से शिव विवाह का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जब सती द्वारा शिव के अपमान से आहत होकर अपने शरीर का त्याग कर दिया, तब हिमांचल के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। समयानुसार बड़ी होने पर पार्वती की मां मैना देवी ने पति हिमांचल से कहा कि जो घर वर कुल होई अनुपा करिह विवाह सुता अनुरूपा, बेटी के अनुरूप घर वर देख कर अब बेटी पार्वती का विवाह कर देना चाहिए।
महर्षि नारद के कथानुसार पार्वती को तपस्या के लिए प्रेरित किया गया और पार्वती जी ने शिव जी कठोर तपस्या की। सप्त ऋषियों के परीक्षा लेने के बाद शिव पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। जया किशोरी ने कहा कि इस प्रसंग से हम सबको यही शिक्षा लेनी की जरूरत है सुखी दांपत्य जीवन के लिए कन्याओं के अनुरूप ही वर का चयन करना चाहिए और हमेशा अच्छा संस्कार देना चाहिए। सभी लोग चाहते हैं कि हमारी बेटियां ससुराल में सुखी रहें, परंतु यह तभी संभव जब हम भी अपने घर आई बहुओं को अपनी बेटी की तरह सम्मान देंगे। क्योंकि बेटियां ही समयानुसार कन्या, बहू, सासू का स्थान लेती हैं।
इस दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।