मृतक रामकुमार की मासूम बेटी अंशिका के साथ पत्नी प्रमिला।
- फोटो : अमर उजाला
डुमरियागंज। न बाराती थे और न कोई साज-बाज। मंगलगीतों की जगह सिसकियां सुनाई दे रही थीं। रोते हुए दुल्हन ने सात फेरे लिए तो दूल्हा बना युवक भी सांत्वना देने में लगा रहा। शादी से ठीक पहले सड़क हादसे में दुल्हन के भाई की मौत के बाद भरवठिया मुस्तकहम में देर रात जैसे-तैसे विवाह की रस्में निभाई गई। मंडप और डोली धरी की धरी रह गई। दूल्हा-दुल्हन ने गांव के मंदिर में सात फेरे लिए। विवाह के दौरान दोनों पक्षों चंद लोग ही शामिल हुए। दूल्हा और उसके पिता समेत कुल पांच रिश्तेदार ही बारात में आए।
शुक्रवार को भरवठिया मुस्तकहम निवासी बेचन के घर बेटी रीता की बारात आनी थी। इससे चंद घंटे पहले ही सड़क हादसे में रीता के भाई रामकुमार की मौत हो गई। इस घटना ने पूरा परिदृश्य ही बदल दिया। मंगलगीतों की जगह हर तरफ घर वालों के चीख-पुकार गूंज रहे थे। सूचना पाकर पास के ही कटयां स्थित दूल्हे के घर में भी शोक छा गया। दूल्हे के पिता गंगादीन रिश्तेदारों के साथ पहले डुमरियागंज थाने पर पहुंचे। रात करीब 9.30 बजे लोग रामकुमार के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद दूल्हा रमेश कुमार व तीन अन्य रिश्तेदारों के साथ भरवठिया गांव में शादी की रस्म निभाने के लिए पहुंचे।
पांच लोगों की यह बारात गांव में दुर्गा मंदिर पर ही ठहर गई। यहां सादगी के बीच देर रात गमगीन माहौल में रीता की शादी हुई। शादी और सात फेरे के दौरान रीता फफक कर रोती रही तो उसकी सहेलियां और अन्य लोग उसे सात्वंना देकर ढांढ़स बंधाती। शादी के बाद शनिवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे बिना दुल्हन के ही दूल्हा रमेश को विदा किया।