सिद्धार्थनगर जिले में पांच दिन की बारिश से नदियां उफान पर हैं। इससे कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं और आवागमन बाधित हो गया है। बूढ़ी राप्ती नदी दूसरे दिन भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और बढ़त पर है, जबकि राप्ती नदी लाल निशान के करीब पहुंच चुकी है। यही हाल अन्य नदियों का भी है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं।
बूढ़ी राप्ती नदी के दूसरे दिन भी खतरे के निशान पार रहने और राप्ती की बढ़त और लाल निशान के करीब पहुंचने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की धड़कन बढ़ गई है। तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, शोहरतगढ़ क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी व सोतवा नाले का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बढ़नी क्षेत्र में नकोलडीह जाने वाले मार्ग, पन्नापुर मार्ग व तमकुहवा के मार्ग पर पानी बह रहा है। ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन तीनों मार्गों पर नाव की सहायता से आवागमन हो रहा है।
इसके अलावा बूढ़ी राप्ती नदी व सोतवा नाले का पानी भी भुतहवा, मटियार, गड़रखा, झुंगहवा आदि गांवों के खेतों में फैल गया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि नदियों के बढ़ रहे जलस्तर के साथ ही विभागीय लगातार निगरानी कर रहे हैं। संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए तैयारी की गई है।
नदी का जलस्तर मीटर में
नदी खतरे का बिंदु रविवार का जलस्तर
बानगंगा 93.420 92.000
राप्ती 84.900 83.610
बूढ़ी राप्ती 85.650 85.840
कूड़ा 83.520 81.530
घोघी 87.000 85.300
तेलार 87.500 84.700
जमुआर 84.89 82.10
मदरसा व कई घरों पर मंडराया खतरा
भनवापुर। राप्ती के बढ़ते जलस्तर से नदी के किनारे बसे डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भरवठिया बाजार व पिकौरा गांव का एक मदरसा तथा 12 से अधिक मकानों के राप्ती में विलीन होने का अंदेशा है। पिकौरा तथा भरवठिया बाजार गांव के दक्षिण नदी के कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने पिलर व बोरे में बालू भरकर लगाया था। पिकौरा गांव निवासी शिव प्रसाद, राजेंद्र, रोहित, महेश, रामकुमार का मकान नदी से करीब दो मीटर की दूरी पर स्थित है, जो राप्ती में कभी भी विलीन हो सकता है। उन्होंने बताया कि गर्मी में कटान रोकने के लिए जो सीमेंटेड पिलर, बोल्डर और बालू भरकर बोरे लगाए गए थे, वे भी नदी में बह गए। इससे उनके घर कटान की जद आते जा रहे हैं। भरवठिया बाजार गांव में स्थित अरबी मदरसा, अब्दुल बारी, मोबीन, वसीम के घर राप्ती नदी की कटान की जद में हैं।