विकास खंड बढ़नी के दक्षिणी छोर पर बूढ़ी राप्ती, बानगंगा व घोराही नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोग बरसात में नदियों के उफान को लेकर चिंतित हैं। दो वर्ष पहले आई भयानक बाढ़ ने कई घरों को बेघर कर दिया था। समय रहते प्रशासन ने अगर बचाव का कोई ठोस प्रबंध किया होता तो बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए परेशान नहीं रहते। इस बार अच्छी बारिश को लेकर किए जा रहे पूर्वानुमानों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। अबकी बारिश में नेपाल से बूढ़ी राप्ती व घोरही नदी में पानी आता है तो कचरिहवा व बालानगर जैसे गांवों में बाढ़ से तबाही मच जाएगी।
शोहरतगढ़ तहसील अंतर्गत घोरही, बूढ़ी राप्ती व बानगंगा नदी के किनारे बसे बाढ़ प्रभावित गांव गोनहा, तमकुहवा, केवटलिया, जलापुरवा, गडऱखा कौववा, मटियार, भुतहवा, टीकर, करौता, चिरहगना, नकोलडीह, मुरव्वनडीह, पन्नापुर, खैरी, तौलिहवा, प्रतापपुर, कचरिहवा, बालानगर, लालपुर, झुंगहवा तिरछहवा, बसहिया के खैरा, धनौरा व महदेइया टोले के हजारों रहने वाले लोगों के जेहन में 2014 की तबाही का मंजर आज भी कौंध रहा है।
बूढ़ी राप्ती के किनारे बसे तौलिहवा ग्रामसभा के कचरिहवा व बालानगर टोलों में गत कई वर्षों से कटान हो रहा है। बालानगर के रामप्यारे, हरिराम, शंकर, भानमती, फूला व लालमन समेत दर्जनों लोगों के आशियाने नदी में विलीन हो चुके हैं। बावजूद इसके संवेदनहीन प्रशासन ने पूरे साल इन टोलों को बाढ़ से बचाने का कोई प्रयास नहीं किया, जिससे लोगों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी है।
इस बार भी भारी बारिश होती है तो इन दोनों टोलों में हालात बिगड़ने तय हैं। कचरिहवा टोला अभी एक माह पूर्व ही भयंकर अग्निकांड में तहस-नहस हो चुका है। कहीं बाढ़ की तबाही भी शेष घरों को भी न उजाड़ दे। बता दें गत वर्ष ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर ने दैवी आपदा मद से 267.09 लाख रुपये की लागत से कटान स्थल पर दो अदद डैंपनर (कटान रोकने के लिए निर्माण) व 315 मीटर लंबाई में लांचिंग एप्रेन व पिचिंग कार्य करवाया था।
मगर असमय बनाए जाने के कारण करोड़ों रुपये की लागत से हुआ यह कार्य नदी की आगोश में समा चुका है। इसी तरह बूढ़ी राप्ती के किनारे मटियार-झुंगहवा के बीच पीडब्ल्यूडी सड़क कटान के कारण नदी में समाहित हो चुकी है।
कटान स्थल पर बांस की बैरिकेटिंग लगाकर ईंट से भरे बोरों को कटान रोखे जाने का प्रयास किया जा रहा है। देखना है कि विभाग का यह अस्थाई प्रयास कहां तक कारगर साबित होता है। विभाग ऐसे अस्थाई उपायों के लिए पहले भी करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा चुका है, जबकि मटियार-झुंगहवा के बीच के कटान स्थल के पूरब पचास से अधिक सीमेंट से बने हुए क्यूब रखे हैं। अगर ये क्यूब नदी के कटान स्थल पर होते तो शायद कटान को कुछ हद तक रोका जा सकता है।
घोरही नदी के दोनों किनारों पर बसे तालकुंडा के गोनहा व तमकुहवा टोला बरसात के मौसम में जलमग्न हो जाता है और क्षेत्र से आवागमन भी खत्म हो जाता है। इसी प्रकार खैरी शीतलप्रसाद का पन्नापुर, चिरहगना, मुरव्वनडीह व नकोलेडीह भी यही स्थिति रहती है।
हर साल आने वाली बाढ़ के कारण क्षेत्र के तुलसियापुर-कठेला संपर्क मार्ग का अस्तित्व खतरे में रहता है। इस मार्ग को भुतहवा-मटियार के बीच व मटियार-झुंगहवा के बीच बूढ़ी राप्ती नदी हमेशा काट देती है।
शोहरतगढ़ एसडीएम ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि कचरिहवा के जिन घरों पर कटान के कारण खतरा है। उन को चिह्नित करवा कर उन्हें जमीन आवंटित कर आवासित करने का प्रयास किया जाएगा। रही बात बाढ़ से बचाव के प्रयास की तो पूर्व वर्षों की भांति बाढ़ से बचाव के कार्य किए जा रहे हैं। बाढ़ चौकियों को स्थापित करने के कार्य हो रहे हैं। ऐसे प्रयास प्रशासन की ओर से किए जा रहे हैं कि पूर्व वर्षों की भांति अधिक क्षति न हो।