वन विभाग की लापरवाही से शुक्रवार को ककरहवा जंगल धधक उठा।
घंटों तक जंगल से आग की तेज लपटें उठती रहीं, मगर जिम्मेदार विभाग बेपरवाह रहा। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी वन विभाग की ओर से कोई मदद नहीं पहुंची, अलबत्ता अफसरों ने फोन बंद कर लिया। पुलिस, एसएसबी और ग्रामीण देर रात तक आग को आबादी की ओर बढने से रोकने में जुटे रहे।
नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा जंगल प्राकृतिक संपदा व जड़ी-बुटियों से भरपूर है। शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे जंगल में आग की लपटें उठनी शुरू हो गई। पहले तो ग्रामीणों ने इस पर खास ध्यान नहीं दिया, मगर जब आग तेज गति से बढ़ते हुए आबादी की ओर रुख किया तो हड़कंप मच गया। तत्काल वन विभाग को सूचित करते हुए आग बुझाने में जुट गए।
आस-पास के जलस्रोतों की मदद से ग्रामीणों का समूह आग पर काबू पाने में जुटा रहा, मगर शाम साढ़े 8 बजे तक आग नियंत्रण से बाहर थी। पुलिस चौकी प्रभारी दीपक कुमार द्विवेदी, एसएसबी के इंस्पेक्टर शमशेर सिंह भी अपनी टीम के साथ कस्बे को आग की चपेट में आने से बचाने के लिए मशक्कत में जुटे रहे।
गांव के चारों तरफ खुदाई कर आग को रोकने का प्रयास जारी था, लेकिन जंगल की आग की लपटें बरकरार रहीं। ग्रामीणों का कहना था कि बुधवार को मधवानगर में हुई घटना के बाद ही जंगल की ओर बढ़ गई थी, मगर विभाग की अनदेखी से आग बढ़कर ककरहवा तक पहुंच गई।