संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। हल्लौर स्थित इमामबारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फरोग मातम के तत्वाधान में सालाना अशरे की मजलिस हुई।
मौलाना सैय्यद जहीर अब्बास ने कहा कि जिस तरह कुरआन का मुतावला (अध्ययन) करने से नई-नई जानकारी और दीनी और दुनियावी शिक्षा, ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। उसी तरह से हजरत अली की जीवनी और उनकी फजीलत (शख्सियत ) को बयान करने वाली पवित्र किताब नहजुल बलागा का अध्ययन करने वाले इंसान के नॉलेज- ज्ञान में वृद्धि होती है।
लिहाजा कुरआन और नहजुल बलागा को समझ कर रोज पढ़ना चाहिए। मौलाना ने कहा कि मजलिसे हुसैन इंसान की जिंदगी और किरदार को संवारने का काम करती है। मजलिस में इंसानियत, नेकी और भलाई के रास्तों पर चलने का पैगाम दिया जाता है। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का मंजर बयान किया, जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद हाय हुसैन की सदा बुलंद कर रो पडे़।
मजलिस से पहले मर्सियाखवानी हैदरे कर्रार और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना कुमेल, निहाल, इकबाल मेहदी, इं. मोहम्मद मेंहदी, तसकीन हैदर, तसबीब हसन, कसीम रिजवी, अफसर हल्लौरी, काजिम कर्बलाई, बेताब मौजूद रहे।र