सिद्धाथनगर। भारत-नेपाल बॉर्डर स्थित बर्डपुर क्षेत्र की गायों में लंपी वायरस का संक्रमण होने के लक्षण मिले हैं। माना जा रहा है कि नेपाल में तबाही मचाने वाले लंपी वायरस ने जिले में दस्तक दे दी है। जिन पशुपालकों के घर में गायें बीमार हुई हैं, इलाज कराने में उनकी जेब ढीली हो रही है। गायों में लंपी वायरस के लक्षण मिलने के बावजूद भी पशु चिकित्सा विभाग की टीम गांवों में नहीं पहुंच रही है, जबकि क्षेत्र के लोगों की चिंता है कि लंपी वायरस का संक्रमण फैला तो वे तबाह हो जाएंगे।
बर्डपुर ब्लाॅक के पास बर्डपुर के टोला नंबर नौ, सोनबरसा में गाय में लंपी वायरस के लक्षण मिले हैं। गायों की त्वचा पर गांठ बन गई और तेज बुखार हो गया। नेपाल में लंपी वायरस से तबाही के बावजूद भी पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों को बीमारी फैलने की भनक नहीं लगी है। इस क्षेत्र के तीन पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण मिले हैं। यह बीमारी फैली तो किसानों को बहुत नुकसान हो सकता है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीवन लाल एवं बर्डपुर के पशु चिकित्सक से बात की, लेकिन कोई भी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। जब डॉक्टर बीमार गायों को देखेंगे तो विभाग में रिकॉर्ड में दर्ज करेंगे कि जिन गांयों की त्वचा पर गांठें बनीं हैं, उनमें लंपी वायरस का कहर है या कोई और बीमारी है।
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त्वचा पर गांठ से बीमार हुई छुट्टा गाय
क्षेत्र के देवियापुर में रविवार को सड़क पर जाती हुई गाय की त्वचा पर गांठ दिखी। गांव के लोगों में चिंता है कि यदि अन्य पशुओं में भी यह बीमारी फैल गई तो उन्हें बचाना टेढ़ी खीर होगी। पशु चिकित्सा विभाग ने गोशाला सहित गांवों की गायों को लंपी वायरस से बचाव का टीका लगाया गया है, लेकिन छुट्टा गायों के कारण भी बीमार बढ़ सकती है।
गायों की त्वचा पर है बीमारी की दाग
बर्डपुर के सोनबरसा के उमेश चौधरी ने बताया कि उनके बछड़े को 15 दिन पहले त्वचा पर गांठ की बीमारी हुई थी, एक सरकारी पशु चिकित्सक की लिखी हुई दवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो बीमारी नेपाल में फैली है, वहीं बीमारी बछड़े को हुई है। इसी गांव के बलवंत ने बताया कि 14 दिन पहले गाय बीमार हुई थी, नियमित इलाज करा रहा हूं, देखिए, अब भी गाय की त्वचा पर गांठों की दाग है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम मेरे घर नहीं आई है।
वर्जन
बर्डपुर के सोनबरसा और देवियापुर में सोमवार को विभागीय पशु चिकित्सक जाएंगे। उसके बाद ही बता सकेंगे कि लंपी वायरस का संक्रमण है या नहीं। बाॅर्डर क्षेत्र के बर्डपुर, लोटन, शोहरतगढ़ एवं बढ़नी में लंपी वायरस के टीके भेजे गए हैं, 6800 टीके लगाए जा चुके हैं, टीकाकरण अभियान जारी है।
डॉ. जीवन लाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
रोग के लक्षण
लंपी वायरस से संक्रमित पशु को हलका बुखार रहता है.
मुंह से लार अधिक निकलती है और आंख-नाक से पानी बहता है. पशुओं के लिंफ नोड्स और पैरों में सूजन रहती है.
संक्रमित पशु के दूध उत्पादन में गिरावट आ जाती है.
गर्भित पशु में गर्भपात का खतरा रहता है और कभी-कभी पशु की मौत भी हो जाती है.
पशु के शरीर पर त्वचा में बड़ी संख्या में 02 से 05 सेमी आकार की कठोर गठानें बन जाती हैं
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रोकथाम और बचाव के उपाय
जो पशु संक्रमित हो, उसे स्वस्थ पशुओं के झुंड से अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले.
कीटनाशक और बिषाणुनाशक से पशुओं के परजीवी कीट, किल्ली, मक्खी और मच्छर आदि को नष्ट कर दें.
पशुओं के रहने वाले बाड़े की साफ-सफाई रखें.
जिस क्षेत्र में लंपी वायरस का संक्रमण फैला है, उस क्षेत्र में स्वस्थ पशुओं की आवाजाही रोकी जानी चाहिए.
किसी पशु में लंपी वायरस के लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
संक्रमित क्षेत्र में जब तक लंपी वायरस का खतरा खत्म न हो, तब तक पशुओं के बाजार मेले आयोजन और पशुओं की खरीद-बिक्री पर रोक लगनी चाहिए.
स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराना चाहिए ताकि अगली बार उन्हें किसी तरह का संक्रमण न लगे
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यह है बीमारी के लक्षण
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी होती है, जो गाय.भैंसों में होती है।
लम्पी स्किन डिजीज में शरीर पर गांठें बनने लगती हैं, खासकर सिर, गर्दन और जननांगों के आसपास।
बीमार पशु को तेज बुखार हो जाता है और आहार छोड़ देता है