संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पंजाब और हरियाणा का पारंपरिक पर्व लोहड़ी धूमधाम से रविवार को सिद्धार्थनगर, बांसी, नौगढ़, शोहरतगढ़ सहित अन्य कई जगह मनाई गई। पर्व का आरंभ अलाव के जलने से हुआ, जिसके चारों ओर स्थानीय लोग, परिवार और बच्चे एकत्र हुए। लोहड़ी पर परंपरागत गीत और ढोल की थाप ने माहौल को उत्सवपूर्ण बना दिया।
सिक्ख धर्म अनुयायियों ने बताया कि लोहड़ी केवल पर्व नहीं, बल्कि किसानों और आम लोगों के लिए नई फसल, नए वर्ष और खुशियों का प्रतीक भी है। अलाव के चारों ओर लोग परिक्रमा करते हुए गानों पर नाचे और एक-दूसरे को गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। रेवड़ी, गजक, मूंगफली और मक्के की रोटी का आनंद लेने के साथ ही लोग आपसी मेलजोल बढ़ाने का प्रयास भी करते हैं।
लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भट्टी की वीरता और अकबर के समय लड़कियों के सम्मान की कहानी गाई जाती है। बच्चों और युवाओं ने इन गीतों को बड़े जोश और उत्साह के साथ प्रस्तुत किया। गीतों और ढोलक की थाप के साथ लोहड़ी का यह जश्न पारंपरिक आनंद और सांस्कृतिक रंगों से भरपूर रहा।
इस अवसर पर ज्ञानी गुरबाज सिंह, तजिन्दर सिंह ड्यूक, हरभजन सिंह, ऋत्विक सिंह, धर्मेन्दर सिंह, जसमीत कौर, मंजीत कौर, जसकीरत कौर, सुनीता और चरणजीत कौर ने भी उत्सव में भाग लिया और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर लोहड़ी के गीतों और नृत्य का आनंद लिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पर्व लोगों के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ाने और ठंड के मौसम में गर्मजोशी बनाए रखने का अवसर भी है। खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए लोहड़ी के गीतों के माध्यम से परंपराओं का ज्ञान और संस्कृति का अनुभव करने का यह एक अनूठा मौका होता है।