बताया जा रहा है कि लंबे समय से चल रहे गड़बड़झाले में सीनियर अधिकारी भी सीबीआई जांच के दायरे में हैं।
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सिद्धार्थनगर। गोरखपुर मंडल के सहायक आयुक्त (प्रशासन) के 25 साल पुराने आदेश ने सदर तहसील में हड़कंप मचा दिया है। इस आदेश में नेपाल सीमा पर स्थित ककरहवा बाजार व उसके आस-पास की करीब 200 बीघा भूमि पर कब्जे के आधार पर तीन लोगों को स्वामित्व दिए जाने का उल्लेख है।
इस आदेश के अनुपालन के लिए राजस्व परिषद इलाहाबाद के आयुक्त एवं सचिव ने एक सप्ताह का समय दिया है। राजस्व परिषद के आदेश बाद से हल्के के लेखपाल से लेकर एसडीएम तक सकते में है। जिस भूमि का मालिकाना हक दिए जाने का आदेश है, उस पर मौजूदा समय में ककरहवा बाजार है तथा जीजीआईसी और आईटीआई का निर्माण चल रहा है। कुछ पद सैकड़ों वर्ष पुराने बाग-बगीचे और चकरोड स्थित है।
26 सितंबर को राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव का तहसील प्रशासन को पत्र आया है। इसमें तूफानी बनाम फूलमति आदि प्रकरण में 6 फरवरी 1991 को अपर आयुक्त गोरखपुर मंडल की ओर से जारी आदेश 2357/44/एस-1990 का उल्लेख करते हुए तेतरी बाजार निवासी राजेश चंद पुत्र नंदलाल, कैलाशचंद पुत्र श्यामलाल व दुल्हा जनूबी निवासी फूलमति पत्नी राजाराम के पक्ष में 229-बी (कब्जे के आधार पर स्वामित्व) की कार्रवाई को एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
इस पत्र में आयुक्त ने इस कार्रवाई के लिए दो सितंबर को प्रेषित पत्र का भी जिक्र करते हुए कड़ी चेतावनी भी दी है। नेपाल सीमा पर संबंधित भूमि का कुल क्षेत्रफल करीब 200 बीघा बताया जा रहा है। बेसकीमती जमीन पर 25 साल बाद नामांतरण की कार्रवाई को लेकर प्रशासन असमंजस में है।