लेखपाल पर शिक्षकों से अभद्रता करने का आरोप
लेखपाल का दावा एसडीएम के आदेश पर की जांच, एसडीएम बोले कोई आदेश नहीं दिया
शोहरतगढ़ तहसील के कपिया बुकनिहा ग्रांट का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ तहसील के कपिया बुकनिहा ग्रांट में स्थित प्राथमिक विद्यालय अहिरवनडीह में लेखपाल के निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों ने उन पर अभद्र भाषा का प्रयोग किये जाने का भी आरोप लगाया है। लेखपाल का दावा है कि उप जिलाधिकारी के आदेश पर विद्यालय का निरीक्षण किया गया जबकि उप जिलाधिकारी ने इस तरह का कोई भी आदेश जारी करने से इनकार किया है।
कपिया बुकनिहा ग्रांट के लेखपाल धर्मवीर ने नौ और 12 जनवरी को प्राथमिक विद्यालय अहिरवनडीह का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि एसडीएम शिवमूर्ति सिंह के आदेश पर वह विद्यालय की जांच कर रहे हैं। निरीक्षण में उन्होंने उपस्थिति पंजिका देखी। प्रधानाध्यापिका जयललिता और शिक्षामित्र रोहित यादव ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान लेखपाल ने उन लोगों से अभद्र भाषा में बातचीत की। लेखपाल के व्यवहार से शिक्षकों को मानसिक आघात पहुंचा। लेखपाल धर्मवीर ने कहा कि स्कूल समेत 22 विभागों का निरीक्षण करने का अधिकार है। अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप निराधार है। इस बाबत एसडीएम शोहरतगढ़ शिवमूर्ति सिंह ने बताया कि किसी भी विद्यालय के निरीक्षण के लिए लेखपाल को नहीं लगाया गया हैं। उनके नाम पर यदि कोई निरीक्षण किया गया है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई कराएंगे। वहीं, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हेमंत शुक्ला ने लेखपाल के व्यवहार को शिक्षा जगत की गरिमा पर आघात बताते हुए कहा कि इस संबंध में आला अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। जांच और दोषी लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
लेखपाल की अति सक्रियता पर भी सवाल
गांववालों ने विद्यालय निरीक्षण करने वाले लेखपाल पर मामले में अति सक्रिय होने का आरोप लगाया। इन लोगों का कहना था कि लेखपाल विद्यालय की जांच करने तीन दिन में दो बार पहुंचे जबकि इसी विद्यालय के बगल में जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की जांच करने आए ही नहीं। गांव के रामकिशुन वर्मा और शिवकुमार ने बीती एक दिसंबर को तहसीलदार का शिकायती पत्र देकर विद्यालय के बगल की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग की थी। इन लोगों का दावा है कि तहसीलदार ने लेखपाल को जांच कर निर्माण कार्य रुकवाने को निर्देश दिया था, बावजूद लेखपाल मौके पर देखने तक नहीं गए। ग्रामीण मनोज प्रभाकर ने आईजीआरएस पर शिकायत करके मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई हैं।