घाघरा में गेहूं की ढुलाई करते किसान।
लार। चुरिया महालमंझरिया गांव के सामने घाघरा नदी पर किसानों के देवारा क्षेत्र में आवागमन के लिए प्रस्तावित पीपा पुल के आगे कानूनी अड़चन आ गई है। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने टेंडर करने में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अब कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद ही पीपा पुल लगाया जाएगा। ऐसे में इस वर्ष भी यूपी के देवरिया बलिया और बिहार के किसानों को फसल की कटाई ढुलाई कराने के लिए जान जोखिम में डाल नदी पार कर आना-जाना पड़ेगा।
चुरिया महालमंझरिया गांव के सामने घाघरा नदी उस पार करीब 10 हजार एकड़ से अधिक खेती है। इसमें बलिया के हल्दी रामपुर, बिहार के गुठनी और देवरिया के चुरिया, नदौली, खेमादेई कौषड सहित कई गांव के किसानों की भूमि है। नदी के रास्ते लोग ट्रैक्टर और कृषि संसाधनों को जान जोखिम में डालकर उस पार पहुंचते हैं। फसल तैयार होने के बाद कड़ी मशक्कत कर कंबाइन मशीन को लेकर पहुंचते हैं। इस दौरान कई बार हादसे के लोग शिकार हो जाते हैं। चार माह पहले भी नाव से पशुओं का चारा लेकर लौट रहे किसानों की नाव नदी के भवर में फंसकर डूब गई। हालांकि संयोग ठीक रहा कि नदी तट पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखा चार लोगों की जान बचाई थी। इलाके के किसान कई वर्षों से नदी के ऊपर पीपा पुल निर्माण कराने की मांग कर रहे थे।
शासन ने इसका संज्ञान लेते हुए नदी पर पीपा पुल बनाने की स्वीकृति देते हुए 75 लाख से अधिक आवंटित कर दिया। जिसमें लोक निर्माण के तरफ से टेंडर आमंत्रित किया गया था। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली एक फर्म ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। जिसके बाद से मामला न्यायालय में विचारधीन है। जिसके वजह से पीपा पुल लगने में देरी होगी। ऐसे में इस बार भी किसानों को नदी पार से कटाई मड़ाई के बाद गेहूं की ढुलाई करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
मामला हाईकोर्ट में विचारधीन है। निर्णय आने के बाद ही पीपा पुल का कार्य कराया जाएगा।
जंगबहादुर सिंह,एक्ससीएन लोक निर्माण विभाग देवरिया