सिद्धार्थनगर। फाइनेंस कंपनियों की जड़ें ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी होती जा रही हैं। एजेंट गरीब तबके के लोगों को कम ब्याज दर पर ऋण दिलाने का झांसा देकर फंसा रहे हैं। वसूली के लिए इस कदर उत्पीड़न कर रहे हैं कि जान देने तक की नौबत आ जा रही है।
एजेंटों की बदसलूकी और उत्पीड़न के डर से लोग जमीन गिरवी रखकर कर्ज चुका रहे हैं तो कोई गहने बेच दे रहा है। किस्त की अदायगी के लिए उत्पीड़न से परेशान लोटन कोतवाली क्षेत्र की महिला ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। जब गांव के लोगों से फाइनेंस कंपनी के कर्ज और किस्त के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि कर्ज में डूबे होने से पीड़ित एजेंट के खिलाफ शिकायत नहीं कर पाते हैं।
पुलिस और प्रशासन भी मामले को संज्ञान में नहीं ले रहा, जिससे कर्ज बांटने वाले गिरोह का उत्पीड़न बंद हो सके। विधि विशेषज्ञ का कहना है कि प्रशासन को जांच कराने का पूरा अधिकार है। अगर पीड़ित आगे नहीं भी आ रहा है तो भी फाइनेंस कंपनी की जांच की जानी चाहिए और गड़बड़ पाए जाने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस संबंध में कोतवाल लोटन राजेश गुप्ता ने बताया कि देर शाम तहरीर मिली है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
किसी ने की आत्महत्या की कोशिश, कोई घर छोड़ने पर हुआ मजबूर : खेसरहा थाना क्षेत्र ढोलगाढ़ा गांव में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के मकड़जाल में बीस से अधिक महिलाएं फंसी हैं। लोन व किस्त चुकाने के लिए कई महिलाओं को जमीन और गहने तक गिरवी रखने पड़े। एजेंटों के खौफ से दो महिलाएं घर छोड़ कर कहीं चली गई हैं।
कंपनियों के एजेंट उनके घर जाकर उन्हें किस्त जमा करने की धमकी दे रहे हैं। बताया जाता है कि पांच माह पहले किस्त जमा करने के दबाव के चलते गांव की पुष्पा पत्नी टीकमचंद ने फंदा लगा लिया। बच्चों के शोर मचाने पर गांव की महिलाओें ने उसे किसी तरह बचाया था। उसके पति ने छह मंडी जमीन बेच कर किस्त जमा की।
लोन अब भी चल रहा है। महिला घर छोड़कर कहीं चली गई है। इसी तरह कांती भी तीन बच्चों को छोड़कर कहीं चली गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चे ननिहाल में रह रहे हैं। इंद्रावती ने बताया कि आभूषण बेचकर पैसे देने के बाद भी कर्ज खत्म नहीं हुआ है।
हमारे पास लोन अदायगी से संबंधी कोई कागजात नहीं है। बीच में शिकायत हुई तो एजेंटों ने आना बंद कर दिया। लेकिन, कुछ लोगों से जानकारी मिल रही है कि वसूली के लिए एजेंट फिर आएंगे। इस गांव की प्रेमशीला, इंद्रावती, शकुंतला ने जेवर गिरवी रखकर किस्त दी थी।