: शहर से लेकर गांव तक हो रही कृषि भूमि पर अवैध तरीके से प्लाटिंग
: मंहगी कीमत देकर खरीद रहे जमीन, लैंड यूज बदलने के लिए तहसील का लगा रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर से लेकर गांव तक कृषि भूमि की प्लाटिंग कर बिक्री करने का खेल जारी है। बिना लैंड यूज बदले ही आवास बनाने के लिए बेची जा रहे भूमि को खरीदने से पहले जरूर जांच पड़ताल कर लें। अन्यथा भूमि खरीदने के बाद मकान बनाने के लिए उसे अकृषक दर्ज कराने के लिए तहसील का चक्कर लगाना तय है।
ऐसे कई लोग जो कृषि भूमि खरीदने के बाद उसे अकृषक कराने के लिए तहसील में लेखपाल से लेकर अधिकारी के पास दौड़ते नजर आ रहे है। वहीं जमीन कारोबारी प्लाटिंग के दौरान सरकारी भूमि का भी उपयोग करने से बाज नहीं आ रहे है। ऐसे ही मामले में बर्डपुर कस्बा, बढ़नी नगर पंचायत में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।
वर्तमान में शहर के पकड़ी गोरखपुर रोड, सनई चौराहे से आगे बांसी व शोहरतगढ़ मार्ग पर प्लाटिंग की गयी भूमि नजर आती है। इसके साथ ही पकड़ी जोगिया मार्ग, मधवापुर से सुकरौली रोड, सोहांस मार्ग समेत मुख्य सड़क से कटकर गांवों में जाने वाले संपर्क मार्गों पर भी कृषि भूमि पर प्लाटिंग की जा चुकी है। जमीन कारोबारी इन भूमियों को मौके पर सड़क किनारे और बेशकीमती दिखाकर लोगों को बेच रहे हैं।
वहीं बाद में इस भूमि पर अपना आशियाना बनाने के लोग तहसील का चक्कर लगाने को मजबूर है। शहर से बर्डपुर अलीगढ़वा मार्ग पर आवास बनाने के लिए तीन मंडी जमीन खरीदने वाले बर्डपुर क्षेत्र के अशफाक बुधवार को तहसील में चक्कर लगाते मिले। उनका कहना था कि सड़क किनारे की जमीन खरीदने के बाद जब मकान बनाने के लिए ऋण लेना हुआ तो पता चला कि यह कृषि भूमि है। इस पर मकान बनाने के लिए ऋण नहीं मिल सकता। इसके बाद इस भूमि को धारा 80 के तहत अकृषक कराने के लिए परेशान है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए वह तहसील में लेखपाल व अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं।
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जहां थी फसल, वहां हो चुकी है प्लाटिंग
शहर के आसपास के गांवों तक एवं सड़क किनारे जहां एक वर्ष पहले गेहूं एवं धान समेत अन्य फसल नजर आती थी, वहां अब जमीन कारोबारी प्लाटिंग कर चुके हैं। इन कृषि भूमि को वर्ग फीट की दर से बेचने के लिए जमीन कारोबारियों ने दो-दो व तीन मंडी तक क्षेत्रफल में दीवार खड़ी कर प्लाटिंग कर दी है। इससे यहां दीवार व घास फूस नजर आ रही है। इन खेतों के स्वामी किसानों को जमीन कारोबारी कुछ पैसे एडवांस देकर कृषि भूमि पर प्लाटिंग कर ग्राहक खोजते हैं। इसके बाद वह खरीदार को किसान से सीधे भूमि बैनामा कराते हैं। इससे पहले वह न तो धारा 80 करा भूमि अकृषक घोषित कराते है और न ही प्लाटिंग के लिए नियमानुसार जिला पंचायत से अनुमति लेते हैं।
सरकारी भूमि पर प्लाटिंग, हुई प्रशासनिक कार्रवाई
बढ़नी नगर पंचायत के मुड़िला देहात में स्थित ताल की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग कर दी गयी थी। इसकी पैमाइश एवं जांच में सरकारी भूमि पर कब्जे की पुष्टि होने पर नगर पंचायत व तहसील प्रशासन ने जेसीबी से निर्माण ध्वस्त करा कब्जा खाली कराया गया। वहीं कुछ दिन पूर्व बर्डपुर कस्बा में जमीन प्लाटिंग के खेल में राजस्व कर्मियों के गठजोड़ का खुलासा हुआ था। बर्डपुर कस्बा में कृषि भूमि की प्लाटिंग कर बिक्री की गई और उसमें नगर पंचायत की तरफ से सड़क का निर्माण भी करा दिया गया। मामले में एसडीएम नौगढ़ ने हल्का लेखपाल को निलंबित कर दिया था, साथ ही नगर पंचायत कपिलवस्तु के ईओ के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा था।
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बिना धारा-80 कराए कृषि भूमि की प्लाटिंग करने की शिकायत मिली तो जांचकर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कृषि भूमि पर प्लाटिंग से पहले नियमानुसार धारा-80 के लिए आवेदन कर उसे अकृषक घोषित कराना चाहिए और प्लाटिंग के लिए भी अनुमति लेनी चाहिए।
-कल्याण सिंह मौर्य, एसडीएम, नौगढ़