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Siddharthnagar News: खारिज केस में नहीं सुलझ रहा विवाद, अपील कर रहे फरियादी

Mon, 16 Oct 2023 10:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- देवरिया कांड के बाद 10 दिन में निस्तारित किए गए 2450 जमीन विवाद
राजस्व न्यायालय में जमीन विवाद में खारिज केस दर्ज हो रहे निस्तारित की सूची में
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भूमि विवाद के मामलों की सुनवाई में तेजी आई है। शासन के निर्देश पर राजस्व विभाग सक्रिय हो गया है। देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर में हुए हत्याकांड के बाद वर्षों पुरानी जमीन विवाद की फाइलें खंगाली जा रही हैं।
राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों में होने वाली सुनवाई की समीक्षा शुरू हो गई है। खारिज दाखिल और वरासत से जुड़े मामले फटाफट निपटाए जा रहे हैं। जरूरत पर तहसील की टीम मौके पर भी पहुंच रही है। इनमें जो केस खारिज हो रहे हैं, उनमें फरियादी अपील में जा रहे हैं। ऐसे मामलों में सरकारी रिकॉर्ड में केस निस्तारित हो रहे हैं, लेकिन विवाद नहीं सुलझ पा रहा है।
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देवरिया कांड के बाद राजस्व न्यायालयों में 10 दिन सुनवाई हुई है। इसमें डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के न्यायालय में 2450 से अधिक केस निस्तारित हुए हैं। जिले में पांच तहसीलें हैं। एक औसत के अनुसार जिले में हर दिन करीब 200 से 250 केस निस्तारित किए जा रहे हैं। हालांकि, गुणवत्ता के अनुसार केस खारिज भी किए जा रहे हैं।
महज छह दिन के अंदर जिले की पांचों तहसीलों में भूमि विवाद से संबंधित लगभग 2450 से मुकदमे निस्तारित किए जा चुके हैं। इसमें अधिकतर खारिज दाखिल और वरासत के मामले हैं। लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन गंभीर है।

डीएम ने चकबंदी विभाग और राजस्व विभाग के मुकदमों को सूचीबद्ध करा लिया है। इनके निस्तारण के लिए संबंधित न्यायालयों के मजिस्ट्रेट को नियमित सुनवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसकी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर टीम भी गठित की गई है।

तहसील स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस में प्राप्त होने वाली शिकायतों की सुनवाई में भी तेजी देखी जा रही है। अधिकारी-कर्मचारी खुद मौके पर जाकर सुलह-समझौते के आधार पर मामला खत्म करा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भूमि विवाद के लंबित मामलों को संज्ञान में लिया है। उन्होंने डीएम और एसपी समेत अन्य अधिकारियों को लंबित भूमि विवाद से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद से जिला प्रशासन इन मामले को लेकर गंभीर हो गया है।

पहले मिलती थी तारीख, अब हो रही सुनवाई
कलक्ट्रेट सहित जिले की पांचों तहसीलों में वरासत, पुश्तैनी जमीन पर दूसरे पर कब्जा, भाइयों में हुए बंटवारे समेत अन्य भूमि संबंधित मामले लंबित हैं। इसमें कुछ ऐसे मामले भी थे, जो बीते दो से तीन वर्ष से लंबित हैं। निस्तारण के लिए वादकारियों को हर बार तारीख पर तारीख मिलती थी। हर तारीख पर वादकारी इस उम्मीद में तहसील पहुंचता था कि आज हाकिम कोई फैसला सुना देंगे, लेकिन तहसील पहुंचने के बाद वकील उन्हें अगली तारीख बताकर घर भेज देते थे। अब यह परंपरा खत्म हो रही है।



संपूर्ण समाधान दिवस के मामले तत्काल निस्तारित

पांचों तहसीलों में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान प्राप्त शिकायतों में लगभग 60 से 65 प्रतिशत मामले को तत्काल निस्तारित कर दिया जा रहा है। इसमें अधिकतर भूमि विवाद से संबंधित बताए जा रहे हैं।

केस -एक

मुख्यमंत्री पोर्टल पर कई बार शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन मेरी शिकायत पर आज तक कोई कार्रवाई तहसील प्रशासन की ओर से नहीं की गई। तहसील से फर्जी रिपोर्ट लगाकर अधिकारी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि एक शिकायत में दो दिन पूर्व लगी रिपोर्ट में मौके पर कोई अधिकारी मेरे गांव नहीं आया और रिपोर्ट लगा दी कि अब कोई समस्या नहीं है।
-इमाम अली

केस दो
सरोथर कठौतिया में तैनात हलका लेखपाल ने बिना गांव में आए, पैमाइश व अतिक्रमण खाली कराए ही पैमाइश व सीमांकन कर खाली होने की रिपोर्ट दी। इस कारण में मुझे फिर से आवेदन करना पड़ा है। केस निस्तारित करने के इस तरीके से मौके पर विवाद बना हुआ है।
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-ओम प्रकाश तिवारी

जमीनी विवाद तेजी से निस्तारित किए जा रहे हैं। गुणवत्ता के आधार पर केस निस्तारित हो रहे हैं। जो केस खारिज करने योग्य है, उसे खारिज किया जा रहा है। ऐसे केस में फरियादी अपील कर सकता है, लेकिन अपील में संबंधित बिंदु पर ही सुनवाई होती है। तेजी से सुनवाई की जा रही है। ताकि अधिकतम केस निस्तारित हो जाएंं।
-पवन अग्रवाल, डीएम
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