सूचना और संचार के इस युग में भी जिले के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां अब तक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच सका है। नेटवर्क के अभाव में देश-दुनिया से कटे इस क्षेत्र के लोग संचार स्थापित करने में विफल हैं।
इन्हीं में से एक है कपिलवस्तु क्षेत्र। गौतम बुद्ध के क्रीड़ांगन के रुप में देश-दुनिया में मशहूर इस पर्यटन स्थल पर मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नदारद है। यूनिवर्सिटी स्थापित होने के बावजूद मोबाइल सिग्नल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। नेटवर्क से दूर क्षेत्रवासी मजबूर हैं।
उन्हें चिट्ठी पत्री का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर पड़ोसी देश के नेटवर्क पर अंतर्राष्ट्रीय रोमिंग का शुल्क चुकाना पड़ रहा है।नेपाल बॉर्डर पर स्थित कपिलवस्तु क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की समस्या शुरू से ही रही है।
बॉर्डर होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील भी है, बावजूद यहां की नेटवर्क सुविधा बेहतर बनाने में दूरसंचार विभाग उदासीन बना हुआ है।
कहने के लिए तो काफी पहले ही बीटीएस स्थापित किया जा चुका है, मगर शुरू अब तक नहीं हुआ। मोबाइल सिग्नल न होने से जहां अराजक तत्व बेखौफ हैं, वहीं क्षेत्रवासियों को भी संदेशों के आदान-प्रदान में चिट्ठी पत्री की पुरानी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
गौर फरमाने वाली बात है कि करीब छह माह पूर्व यहां यूनिवर्सिटी भी स्थापित हुई है, जिससे छह जिलों के दो सौ कॉलेज जुड़े हुए हैं। इन कॉलेजों तक सूचनाओं के आदान-प्रदान में मोबाइल और इंटरनेट की उपयोगिता सर्वाधिक है। मगर दूरसंचार विभाग के अफसरों की उदासीनता से यूनिवर्सिटी प्रशासन को आवश्यक पत्राचार के लिए भी 20 किमी दूर नौगढ़ मुख्यालय आना पड़ता है।
दूरसंचार विभाग के एसडीओ रूपेश सिंह ने बताया कि बॉर्डर एरिया का नेटवर्क दुरुस्त करने के लिए बीटीएस स्थापित कर दिया गया है। इसे चालू करने का प्रयास जारी है। एक-दो दिनों में यूनिवर्सिटी का बीटीएस शुरू हो जाएगा। एक सप्ताह के अंदर आधा दर्जन बीटीए चालू कर दिए जाएंगे।