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महंगाई की मार से दिहाड़ी मजदूरों के भी हाथ खाली

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महंगाई की मार से दिहाड़ी मजदूरों के भी हाथ खाली
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निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से भवन निर्माण के कार्य हुए कम
काम नहीं मिलने से लेबर चौक से मायूस होकर लौट जाते हैं मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ईंट, सीमेंट और सरिया समेत अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमत बढ़ने की मार दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रही है। हालत यह है कि भवन समेत अन्य निर्माण कार्य कम होने से काम की तलाश में निकले मजदूर निराश होकर घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं। अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार सुबह शहर के लेबर चौक की पड़ताल की तो सुबह नौ बजे तक काम नहीं मिलने से महंगाई को कोसते हुए कई मजदूर घर लौट रहे थे।
सुबह आठ बजे लेबर चौक पर मजदूरों की भीड़ लगी थी। इनमें कई दूर-दराज के गांव से काम की तलाश में आए हुए लोग भी शामिल थे। लेकिन काम नहीं मिलने की वजह से लोग निराश होकर काम का इंतजार कर रहे थे। लोग टकटकी लगाए देख रहे थे कि अब कोई आएगा और उन्हें अपने साथ लेकर जाएगा पर घंटों खड़े रहने के बाद भी कोई नहीं आया। मजदूरों ने बताया कि रोज आकर चौराहे पर खड़े हो जाते हैं। लेकिन काम नहीं मिलने से समय की बर्बादी होती है।
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ढुलाई के कारण बढ़ी महंगाई
डीजल के दाम लगातार बढ़ने से अन्य सामग्रियों के साथ भवन निर्माण सामग्री के दाम भी बढ़ गए हैं। इनमें सीमेंट, सरिया, बालू व मोरंग शामिल है। जबकि कोयले की कीमत में बढ़ोतरी से ईंट महंगा हो गई है। इन सामग्रियों के महंगे होने से लोग भवन समेत अन्य निर्माण कार्य से मुंह मोड़ रहे हैं।
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क्या है लेबर चौक
शहर के सिद्धार्थ तिराहे के बगल में नगर पालिका कार्यालय के आसपास सुबह छह से सात बजे तक कस्बा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के सैंकड़ों मजदूर काम की तलाश में पहुंच जाते हैं। जहां से निर्माण कार्य कराने वाले लोग इनमें जरूरत के मजदूरों का चयन कर कार्यस्थल पर ले जाते हैं। इसी स्थान को लेबर चौक कहा जाता है।
सुबह साढ़े छह बजे ही आ गया था। अब तक काम नहीं मिला है। पहले चौराहे पर पहुंचते ही काम कराने वाले मिल जाते थे। लेकिन अब काम मिलना मुश्किल हो रहा है।
- तिलकराम
जब से ईंट, सीमेंट, बालू, मोरंग और सरिया के दाम बढ़े हैं, लोग मकान बनवाने से बच रहे हैं। अब काम कम हो गया है।
- सेराज
सुबह से ही मजदूरी का इंतजार करने के बाद भी काम नहीं मिलने पर पूरा दिन खराब हो जाता है। आर्थिक तंगी से भी जूझना पड़ रहा है। - महेश
काम नहीं मिलने से दिन बर्बाद हो जाता है और हाथ भी खाली रह जाता है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
- बबलू
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