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Siddharthnagar News: बम फेंककर लूट करने वाले गिरोह के सरगना को पकड़ने में फेल सर्विलांस और एसओजी

Mon, 01 Jan 2024 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। कोटिया पुलिस चौकी के पास सुतली बम फेंककर कारोबारी के घर में लूटपाट करने वाले गिरोह के सरगना व मुख्य साथी को पकड़ने में सर्विलांस व एसओजी की टीम फेल हो गई है। डेढ़ महीने पहले हुए इस घटना में गिरोह के प्यादाें को पकड़कर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। पुलिस इस गिरोह के सरगना को पकड़ने का सिर्फ दावा कर रही है। नेपाल में इस गिरोह का रिकार्ड रहा है कि एक से दो महीने में इलाके में बड़ा हाथ मारते हैं।
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शोहरतगढ़ के कोटिया कस्बे में कोटिया पुलिस चौकी से 300 मीटर दूरी पर कारोबारी अवधेश अग्रहरि के घर सात नवंबर की रात बदमाशों ने धावा बोलकर लूटपाट की थी। घर के पीछे से लुटेरे अंदर घुसे। उनके डर से परिवार अगले हिस्से से भाग निकला था। कारोबारी के मुताबिक लुटेरों ने फायरिंग करने के साथ ही भागते समय बम भी फेंका था। आसपास के जनपदों में खाक छानने के बाद घटना के 18 वें दिन पुलिस ने नेपाल के दो लुटेरों का पकड़ा था। आरोपियों की पहचान कपिलवस्तु के चंदरौटा स्थित बसंतपुर चौक निवासी राकेश यादव और औरहवा के मनोज यादव के रूप में हुई थी। आरोपियों के कब्जे से 7700 भारतीय मुद्रा, एक कुल्हाड़ी, एक खंती, सरिया एक, प्लास व पेचकस बरामद किया था। लेकिन पुलिस गिरफ्त में आये आरोपी सिर्फ गिरोह के प्यादे थे। सरगना और उसका मुख्य साथी पुलिस के हाथ नहीं लगा था। पुलिस ने उन्हें जल्द ही पकडने का दावा किया था। वारदात हुए डेढ़ माह बाद भी पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। यह हाल तब है, जब जनपद में चोरी की कई वारदात हो चुकी है। इनके आजाद रहने से सीमा एरिया असुरक्षित है। यह बात सीमावर्ती क्षेत्र के लोग कह रहे हैं।

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सीमा से सटे नेपाल में है गिरोह की धमक

सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लूट में शामिल परवेज और राजकुमार शातिर अपराधी हैं। सीमा से लेकर 50 किलोमीटर अंदर मधेस इलाके तक धमक है। लूट और चोरी करके भागते समय लोगों में दहशत फैलाने के लिए सुतली बम का प्रयोग करते हैं। नेपाल में दबाव बढ़ता है तो सीमावर्ती क्षेत्र में शरण ले लेते हैं। यहां वारदात करने के बाद सीमा से 50 किलोमीटर दूर ठिकाना बना लेते हैं। इससे पुलिस की नजर से बच जाते हैं।
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एक सुरक्षाकर्मी ने बताया कि इनके वारदात करने का तरीका बावरिया गिरोह जैसा है। बावरिया गिरोह के लुटेरे वारदात को अंजाम देने के बाद निकलते समय डंडे और सरिया से प्रहार करते हैं। सामने वाले को चीखता हुआ देखकर इस गिरोह के सदस्यों को खुशी होती है। हमला करने के पीछे इनका उद्देश्य दहशत फैलाना ही रहता है। जबकि यह गिरोह चोरी करने के बाद जाते समय हाथ से बने बम को फेंकता है। इससे लोग दहशत में आ जाएं। यही काम कोटिया में किया था।

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नेपाल में फैला है गिरोह का नेटवर्क

लुटेरों के इस गिरोह का नेटवर्क बजहा बार्डर से लेकर बढ़नी तक फैला है। सूत्र बताते हैं कि इस गिरोह का सीमा इस पार लोगों से गहरा संबंध है। इनके पास गिरोह के सदस्य आते हैं और खूब खर्च करते हैं। इस पार रहने वाले लोग गिरोह के लिए रेकी का काम करते हैं। इनसे मिले इनपुट पर ही वारदात को अंजाम देते हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक गिरोह के सदस्य सीमा के इस पार के लोगों के घरों में ठिकाना भी बना लेते हैं। यहां मेहमान बनकर रहते हैं। बड़ा हाथ माकर कुछ दिनों के लिए इलाका छोड़ देते हैं। घटना को हुए डेढ़ माह का समय बीत चुका है। ऐसे में खुला घूम रहे दोनों शातिर फिर घटना को अंजाम दे सकते हैं।
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वर्जन

वांछित अपराधियों पर पुलिस की नजर है। एसओजी और थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है। जल्द ही फरार चल रहे वांछित पुलिस के हाथ लगेंगे।

अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
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