लंबी जद्दोजहद व भागदौड़ के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार को कमल मेला के आयोजन की अनुमति जारी कर दी। हालांकि इस अनुमति के लिए सांसद को भी जोर लगाना पड़ गया। लिहाजा पहले दिन यह मेला दोपहर 2 बजे से आरंभ हो पाया। जिला जेल के सामने मैदान पर तीन दिनों तक मेला जारी रहेगा। प्रशासन के इस रुख को लेकर भाजपाइयों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
तय कार्यक्रम के तहत कमल मेला शुक्रवार को सुबह 10 बजे से ही आरंभ होना था। इसके लिए 27 दिसंबर को ही अनुमति भी ले ली गई थी। इसी बीच बुधवार को आचार संहिता लागू होने के चलते प्रशासन ने इसे रोक दिया। गुरुवार को दिन भर नए सिरे से अनुमति के लिए भाजपाई कलेक्ट्रेट के चक्कर काटते रहे, मगर अफसर नहीं मिले। देर रात तक यह कवायद जारी रही। मामला सांसद जगदंबिका पाल तक पहुंचा। इसके बाद उन्होंने पहल करते हुए जिला प्रशासन से वार्ता की। इसके बावजूद घंटों बाद अनुमति पत्र जारी हुआ। नतीजा मेले की शुुरुआत पहले दिन दोपहर 2 बजे के बाद हो पाई। सांसद ने फीता काटकर उद्घाटन किया। स्टॉलों का अवलोकन किया। बच्चों में चाय, पॉपकार्न आदि बांटा। मेले में बच्चों के खेल-कूद व मनोरंजन की निशुल्क व्यवस्था की गई है। साथ ही केंद्र सरकार की योजनाएं से जुड़े होर्डिंग भी लगे हैं। इसका अवलोकन करने व खेल-कूद में शामिल होने के लिए बच्चों की भीड़ लगी रही। इस मौके पर जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, दिलीप चतुर्वेदी, राजेश त्रिपाठी, देवेंद्र मिश्र, सच्चिदानंद चौबे, संपूर्णा पांडेय, आशीष शुक्ला, महेंद्र लोधी, रमेश पांडेय, राजमणि पांडेय, अखंड प्रताप सिंह, अखंड पाल, दिलीप सिंह, सोनू सिंह, देवेंद्र त्रिपाठी, मनोज चौबे आदि मौजूद रहे।
प्रशासन के रवैये पर जताई नाराजगी
मेले की अनुमति को लेकर जिला प्रशासन के रवैये पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेताओं का कहना था कि छह जिलों में एक साथ यह आयोजन हो रहा है। अनुमति में अन्य कहीं दिक्कत नहीं आई, सिर्फ यहां ही जिला प्रशासन ने व्यवधान पैदा किया है। सांसद ने कहा कि मेले के लिए जिलाध्यक्ष समेत पार्टी पदाधिकारी गुरुवार को देर रात तक कोशिश करते रहे, लेकिन अफसर टालमटोल में लगे रहे। शुक्रवार की सुबह भी घंटों इंतजार कराया गया, जिससे मेला विलंबित हो। जिलाध्यक्ष ने पहले ही आचार संहिता के नियमों के तहत पार्टी फंड में खर्च जोड़ने का पत्र दे दिया था, बावजूद अनुमति में देरी अफसरों की मंशा को उजागर कर रहा है।