सिद्धार्थनगर। नगर पालिका में तीन साल पहले शामिल हुए क्षेत्र विकास से कोसों दूर हैं। बजबजाती नालियां, टूटी सड़कें, बांस-बल्लियों पर झूलते बिजली के तार और हर ओर फैली गंदगी, यही इन क्षेत्रों की पहचान है। यहां के लोगों का कहना है कि विकास का जितना दावा किया जा रहा है, यदि उसमें 30 फीसदी भी काम हुआ होता तो शहर में शामिल हुए इन क्षेत्रों की तस्वीर बदली नजर आती। शहरी बने कई नए मोहल्लों में बिजली आज भी ग्रामीण रोस्टर के अनुसार ही मिलती है।
तीन साल पहले नगर विस्तार के बाद नगर पालिका में 21 गांवों को शामिल किया गया था, लेकिन ग्रामसभा से अलग होने के बाद कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। सनई, पिपरा पांडेय, बसडिलिया, मधुकरपुर, रेहरा व सेमरनार में ग्रामीण रोस्टर से आज भी बिजली लोगों को मिल रही है। पेयजल की व्यवस्था सभी घरों तक नहीं पहुंच सकी है। नालियां सफाई के अभाव में जाम पड़ीं हैं और गंदगी फैली है। इनमें कई मोहल्लों जर्जर बिजली के तारों के सहारे लोगों के घर तक पहुंची है। इन मोहल्लों में फाल्ट होता है तो ठीक होने पर 12 से 18 घंटे लग जाते हैं सप्ताह में एक से दो बार मोहल्ले की सड़कों पर सफाईकर्मी दिखते हैं। नए मोहल्लों में सड़क टूट चुकी है। वहां के लोगों की मानें तो पूर्व में चेयरमैन और सभासद से निर्माण के लिए कई बार कहे, लेकिन अभी तक सड़क ठीक नहीं हो सकी है। हल्की बारिश में भी सड़क का दृश्य तालाब जैसा हो जता है। ऐसी समस्या से शहरवासी बने लोग जूझ रहे हैं। पकड़ी निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि शहर में जब गांव शामिल हुआ तो खुशी हुई कि सुविधाएं कुछ अधिक मिलेंगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है। थरौली निवासी राकेश का कहना है कि कभी-कभी नालियों की सफाई हो जाती है। गर्मी या बरसात में कभी फाॅगिंग नहीं कराई जाती। पथ प्रकाश के लिए कोई इंतजाम नहीं है। हालांकि, कुछ मोहल्लों में सड़कें बनीं हैं। मोहल्लों में नियमित कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। बरसात के दिनों में अधिकांश मोहल्लों में पानी भर जाता है। जल निकासी के लिए कोई इंतजाम अभी तक नहीं किया जा सका है। निकासी की व्यवस्था के अभाव में नालियां आबादी के बीच बजबजा रही हैं।
धीमी है विकास की गति
बीते तीन वर्ष में शहर में शामिल हुए गांवों में विकास की गति बेहद धीमी है। परसाशाह आलम में एक सड़क निर्माण के अलावा शामिल नए गांवों में कोई कार्य नहीं हुआ। अधिकांश मोहल्लों में टूटी सड़कें बरसात में परेशानी का सबब बन रही है। भीमापार, थरौली, दतरंगवा, बसडिलिया, पकड़ी समेत सभी मोहल्लों में टूटी सड़कें और क्षतिग्रस्त नालियां मरम्मत का बाट जोह रहीं हैं।
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नियमित सफाई का है अभाव
शहर से जुड़े नए मोहल्लों में सफाई कर्मियों के प्रतिदिन नहीं पहुंचने से सड़क किनारे कूड़ा पड़ा रह रहा है। इससे मोहल्ले में कई स्थानों पर लोग कूड़ा डालते हैं जो सड़क पर भी पसरा रहता है। इससे आने-जाने वालों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। पेयजल के लिए पाइप लाइन का भी विस्तार नहीं हुआ है। जलकर एवं गृहकर देने वाले लोग नगर पालिका पर विकास कार्य में भेदभाव करने का आरोप लगा रहे है।
नए शामिल हुए गांवों में विकास की रफ्तार धीमी होने के कारण यहां शहर जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। बिजली समस्या के साथ ही नालियों की सफाई व्यवस्था ध्वस्त है।
- सनी उपाध्याय, अटलनगर
नए मोहल्लों में बिजली व्यवस्था ग्रामीण होने के कारण बहुत समस्या हो रही है, जलनिकासी के लिए नाली का निर्माण नहीं होने व सफाई नहीं होने बहुत दुश्वारियां हैं।
- विकास चौधरी, सनई
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50 करोड़ से बदलेगी तस्वीर
नगर पालिका के समग्र विकास की योजना तैयार कर ली गई है। नगर पालिका बोर्ड की बैठक में विस्तारित क्षेत्र समेत पूरे शहर में जलनिकासी, पथप्रकाश, पुरानी सड़कों की मरम्मत एवं नई सड़क निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे विस्तारित क्षेत्र में शामिल नए मोहल्लों की तस्वीर बदल जाएगी।
- मुकेश चौधरी, ईओ नगरपालिका परिषद