संवाद न्यूज एजेंसी
उसका। माताएं हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अपने बच्चों की सलामती के लिए रखे जाने वाला निर्जला जीवित्पुत्रिका व्रत शुक्रवार को रखेंगी। अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना मन में लिए महिलाएं पूरी श्रद्धा से व्रत को करती हैं।
क्षेत्र के ज्योतिषाचार्य अवधेश द्विवेदी के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत से एक दिन पहले महिलाओं को सात्विक भोजन करना चाहिए। उसके बाद व्रत वाले दिन सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत करने का संकल्प लें। पूजा के लिए भगवान विष्णु के प्रतिमूर्ति जीमूतवाहन भगवान की मूर्ति की स्थापना पानी से भरे एक पात्र में करें। फिर अक्षत, फूल, फल, पीले वस्त्र, सरसों के तेल और बांस के पत्तों आदि से पूजा करें। भगवान को लाल और पीले रंग की रुई चढ़ाएं। उसके बाद व्रत की कथा सुनें और आरती करके पूजा संपन्न करें। व्रत का पारण शनिवार को दस बजकर 21 मिनट के बाद है।
जीवित्पुत्रिका व्रत में बने हैं ये शुभ योग
इस साल जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ऐसी मान्यता है कि इन शुभ योग में जीवित्पुत्रिका का व्रत करना परम फलदायी होता है। इसके अलावा इस दिन आद्रा नक्षत्र और पुनर्वसु नक्षत्र भी लगा रहेगा, जोकि बहुत ही मंगलकारी है।