कपिलवस्तु में पुरातत्व विभाग के नवनिर्मित संग्रहालय में कड़ी निगरानी रहेगी। संग्रहालय का हर कोना तीसरी आंख की जद में होगा। इसके लिए दो मंजिले संग्रहालय में 45 सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों के माध्यम से कर्मचारी पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं के पास से गुजरने वाले हर सख्श पर नजर रखेंगे। इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्य द्वार से लेकर हर कमरे तक कैमरे लगाने और उसे चालू करने का काम जोरों पर है।
दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयाइयों के लिए कपिलवस्तु किसी तीर्थ कम नहीं है। यह वही भूमि हैं, जहां भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के आरंभिक 29 वर्ष बिताए। उनका बचपन इसी क्षेत्र में बीता है।
अस्सी के दशक में हुई खुदाई के दौरान मिले पुरातत्विक अवशेषों से यह पुष्ट भी हो चुका है। गनवरिया और पिपरहवा की खुदाई में यहां से भगवान बुद्ध के अस्थि कलश के साथ ही तमाम ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि प्राचीन कपिलवस्तु यहीं था।
खुदाई में मिले इन अवशेषों को फिलहाल दिल्ली और कोलकाता के संग्रहालय में रखा गया है, जिसे अब नवनिर्मित संग्रहालय में लाया जाएगा। पुरातत्व विभाग के इस संग्रहालय का उद्घाटन 18 मार्च को केंद्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा करेंगे।
संग्रहालय में रखे जाने वाले पुरातत्विक अवशेष न सिर्फ हजारों वर्ष पुराने हैं, बल्कि दुनिया भर में फैले बौद्ध अनुयाइयों के लिए दर्शनीय और बेशकीमती भी। लिहाजा इनकी सुरक्षा के मुकम्मल इंतजाम किए जा रहे हैं।
संग्रहालय को पूरी तरह सीसी टीवी कैमरे की जद में लाया जा रहा है, ताकि कोई भी गतिविधि छिप न पाए। संग्रहालय में प्रवेश से लेकर बाहर आने तक व्यक्ति की हर गतिविधि कैमरे की नजर में रहेगी। दो मंजिला परिसर में कुल 45 सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनकी फिटिंग पूरी हो चुकी है, अब सेटिंग का कार्य जारी है।
इसे गुरुवार तक पूरा कर लिया जाएगा। सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजीव के मुताबिक कैमरे लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सेटिंग का काम जारी है। इसे गुरुवार तक पूरा कर लिया जाएगा।