जैम पोर्टल से बिक्री होने पर कालानमक चावल में मिलावट की आशंका नहीं होगी, क्योंकि चावल किसान से सीधे ग्राहक तक पहुंचेगा। बिचौलियों के माध्यम से बिक्री होने पर मिलावट की आशंका बढ़ जाती है। वे अधिक लाभ के लिए मिलावट करने लगते हैं, जिससे दूसरे शहरों में भेजा गया चावल मानक पर खरा नहीं उतरता है और वापस आ जाता है।
प्रगतिशील किसान अभिषेक सिंह ने कहा कि जैम पोर्टल से कालानमक चावल की बिक्री का लाभ किसान और क्रेता दोनों को मिलेगा। अब जिले में कालानमक धान की का रकबा 10 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
प्रगतिशील किसान दीनानाथ ने कहा कि कालानमक चावल की सुगंध और स्वाद का कोई जवाब नहीं। जैम पोर्टल से बिक्री शुरू होने का लाभ किसानों को मिलेगा। अभी दस किसान पोर्टल से जुड़े हैं। इससे कालानमक चावल की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दयाशंकर सरोज ने कहा कि एक जिला एक उत्पाद योजना में चयनित कालानमक चावल अब जैम पोर्टल के माध्यम से भी बिकेगा। उद्योग कार्यालय से रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही बिक्री शुरू हो जाएगी। कोई समस्या होगी तो जैम सेल से उसका समाधान हो जाएगा।