एक तो सड़क जर्जर और फिर खटारा बस। ऐसे में यात्रियों को परेशान होना लाजिमी है। जिले की सड़कों पर रोडवेज बस में सफर करने वाले यात्रियों की यह दुुर्दशा रोजाना की है।
गड्ढे में तब्दील सड़कों पर रोडवेज की खटारा बसों में यात्रा से खासी दिक्कतें झेलनी पड़ती है। मगर जिम्मेदार इससे बेखबर हैं। सुखद, सुरक्षित और सस्ती सेवा का दावा करने वाले अफसर अपने धुन में मगन हैं।
सिद्धार्थनगर डिपो से करीब पांच दर्जन बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं। लखनऊ रूट पर जाने वाली चंद बसों को छोड़ दें तो अमूमन सभी की हालत खटारा है।
न ढंग की सीट है और न ही बस की बॉडी लंबी यात्रा के अनुकूल है। रही-सही कसर सड़कें पूरा कर रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग में शामिल होने के बाद से ही जिले में आने वाली सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है।
चाहे बस्ती-बांसी होते हुए नौगढ़ जाने वाले मुख्य मार्ग की बात हो या फिर नौगढ़-उसका-फरेंदा होते हुए गोरखपुर या नौगढ़-शोहरतगढ़-बढ़नी मार्ग। पूरी सड़क गड्ढों से पटी है।
गिट्टियां गायब होने से सड़क में कई स्थानों पर गड्ढे पड़ चुके हैं। इन गड्ढों से बसों के गुजरने से यात्रियों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है। रोडवेज को भी चपत लग रही है।