सिद्धार्थनगर। शहर के विवेकानंद नगर में श्रीश्री राधा कृष्ण मंदिर के स्थापना दिवस को लेकर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास हितांशु महाराज ने भगवान के 24 अवतारों के अलावा भगवान शंकर, माता, सुकदेव आदि के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।
इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को धर्म का ज्ञान बचपन में दिया जाता है तो वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। ऐसे में बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान दिया जाना चाहिए।
माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था। ऐसी कई मिसालें हैं, जिससे सीख लेने की जरूरत है। कहा कि हमें समाज में उसी प्रकार रहना चाहिए जैसे जल में कमल का पत्ता रहता है। इस मौके पर संकीर्तन मंडली की सदस्यों ने प्रभु महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कई मनमोहक भजन प्रस्तुत किए, जिन पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा समापन के बाद कथा व्यास हितांशु ने उपस्थित बच्चों से तीसरे दिवस के प्रसंग से संबंधित प्रश्न किए, जिसका सही उत्तर देने वाले बच्चों को व्यास पीठ पर बुलाकर उन्हें पुरस्कृत किया। कथा का समापन भगवत आरती और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।