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खाते से बीमा प्रीमियम कटना आसान, क्षतिपूर्ति पाना मुश्किल

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समय से काटते हैं बीमा प्रीमियम, क्षतिपूर्ति देने में आनाकानी
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किसानों से बीमा कंपनी ने लिया 3.45 करोड़ का प्रीमियम
जलभराव की क्षतिपूर्ति के 147 आवेदन बीमा किए खारिज, 1187 आवेदन लंबित
परमात्मा शुक्ल
सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के खाते से बीमा कंपनियां प्रीमियम राशि काटने में देरी नहीं करतीं लेकिन फसल क्षतिपूर्ति मांगने पर उन्हें नियमों में उलझा रही हैं। खरीफ सीजन में जिले के 37,816 किसानों से 3.45 करोड़ रुपये बीमा प्रीमियम वसूली गई लेकिन जिनकी फसल क्षतिग्रस्त हुई उन्हें अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है।
जिन किसानों के बैंक में केसीसी के खाता है बीमा कंपनियां उन किसानों के खाते से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम राशि तत्काल काट लेती हैं। पूर्व में तो बीमा कंपनियां किसानों की बिना सहमति के ही खाते से प्रीमियम राशि काट लेती थी लेकिन अब सहमति के लिए मौका दिया जाता है। निर्धारित समय में सहमति या असहमति पत्र जमा नहीं करने पर भी बैंक किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट लेते हैं। वहीं किसानों के फसलों का नुकसान होने पर उन्हें बीमा कंपनियों से क्षतिपूर्ति पाना बेहद मुश्किल होता है। किसान मणिकांत तिवारी कहते है कि बीमा कंपनियों से क्षतिपूर्ति पाने में मशक्कत करनी पड़ती है। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि 147 किसानों ने जलभराव से फसलों को हुई क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन बीमा कंपनी ने उनका दावा खारिज कर दिया। वहीं बाढ़ से प्रभावित 47 गांवों के 960 किसान और पीलिया और हथिया रोग से फसल क्षतिग्रस्त होने वाले 287 किसानों के क्षतिपूर्ति के आवेदन बीमा कंपनियों के पास पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा कंपनियां अपने नियमों के अनुसार क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करेंगी।
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लक्ष्य से कम उत्पाद के सापेक्ष मिलती है क्षतिपूर्ति
विभिन्न कारणों से नुकसान हुए फसलों की क्षतिपूर्ति क्रॉप कटिंग में निर्धारित उत्पादन से कम उत्पादन होने के सापेक्ष क्षतिपूर्ति दी जाती है। क्रॉप कटिंग में खरीफ की फसल के लिए निर्धारित लक्ष्य 30.96 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से कम पाए गए मात्रा की सापेक्ष किसान को क्षतिपूर्ति दी जाती है। इसी तरह रबी फसल में निर्धारित लक्ष्य 41.89 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के सापेक्ष कम पाए जाने पर क्षतिपूर्ति दी जाती है।
मुआवजा तो मिला नहीं मिली क्षतिपूर्ति
बाढ़ प्रभावित गांवों के किसानों को सरकार की तरफ से मुआवजा राशि दी गई, लेकिन बीमा कंपनियों ने उनको अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं दी। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि बाढ़ और जलभराव से प्रभावित 103 गांवों के 14042 किसानों को सरकार की ओर से क्षतिग्रस्त फसल का 4.36 करोड़ रुपये मुआवजे की राशि दी गई है। कुछ के खाते गलत थे, उन्हें ठीक करा जल्द ही मुआवजा राशि भेजी जाएगी।
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इस बाबत यूनिवर्सल सैंपो बीमा कंपनी के जिला समन्वयक अजय विश्वकर्मा ने बताया कि खरीफ 2020 में किसानों की क्षतिपूर्ति के लिए जिले से रिपोर्ट नहीं मिली है। जब क्रॉप कटिंग कर रिपोर्ट भेजी जाएगी, तब क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी।
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