सिद्धार्थनगर। यूपी में अपराधियों पर कमर तोड़ने के लिए की जा रही कार्रवाई के बाद बढ़े दबाव के बीच नेपाल भी अब उनके लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा। वारदात को अंजाम देने के बाद सेफ जोन के रूप में इस्तेमाल की चाल अब उल्टी पड़ने लगी है। हाल में ही नेपाल में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद नेपाल पुलिस ने भी अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है।
चार दिन पहले अमेठी के एक ड्रग तस्कर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। वहीं, मंगलवार को गोरखपुर के पांच भारतीय बदमाश भी तस्करी के मामले में नेपाल पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। लगातार कार्रवाइयों ने सीमा पार शरण लेने वाले अपराधियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेपाल से जड़े सूत्रों के मुताबिक पुलिस की स्पेशल यूनिट बाहरी संदिग्धों को टारगेट कर रही है। संगठित अपराध और अपराधियों के खिलाफ पर न सिर्फ कार्रवाई कर रही है बल्कि, यूपी पुलिस की तरह से एनकाउंटर भी कर रही है।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगी हुई। इसके अलावा बहराइच, पीलीभीत, श्रावस्ती, बलरामपुर के अलावा महराजगंज जनपद को भी जोड़ती है। बाॅर्डर क्षेत्र खुला है और मुख्य बार्डर के अलावा अन्य रास्तों से भी लोग आवाजाही करते हैं। मगर, धंधेबाज खुली सीमा का इस्तेमाल तस्करी के लिए करने लगे और अपराधियों के लिए नेपाल सुरक्षित जोन बन गया। खुली सीमा, सीमित दस्तावेजी जांच और सीमावर्ती जिलों से आसान आवाजाही का फायदा उठाकर कई बदमाश गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल का रुख करते रहे हैं।
सीमा से जुड़े सुरक्षा के जानकारों के मुताबिक, यूपी सत्ता परिवर्तन के बाद संगठित अपराध पर कार्रवाई और एनकाउंटर शुरू हो गया। इसके बाद नेपाल में यूपी के बदमाशों की संख्या बढ़ने लगी। यहां से अपराध छोड़ उन्होंने नेपाल में पांव जमाने शुरू किए। ड्रग तस्करी से लेकर, लूट, छिनैती की वारदात को अंजाम देने में जुट गए। नेपाल में चार माह पहले सत्ता परिवर्तन होने के बाद यूपी की तर्ज पर संगठित अपराध, ड्रग तस्करी, लूट, साइबर ठगी के नेटवर्क संचालित करने वालों को ट्रेस कर न सिर्फ धरपकड़ की जा रही है बल्कि एनकाउंटर शुरू कर दिया गया है।
सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नेपाल के हर जनपद में एक स्पेशल सेल बनाई गई है, जो बाहर से आने वालों की गतिविधि पर नजर रखने के साथ उनकी कुंडली तैयार कर रही है।