भारत-नेपाल में तनाव नहीं चाहते सीमा पर रहने वाले परिवार
भारतीय सीमा से लगे है नेपाल तराई के 24 जिले
दोनों देश के नागरिकों की सीमा पार है रिश्तेदारी, खेतीबाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु/धेन्सा बाजार(सिद्धार्थनगर)। भारत-नेपाल के बीच बढ़ रहे तनाव से सबसे ज्यादा चिंतित दोनों देशों की सीमा से सटे जिलों में रहने वाले भारतीय परिवारों को है। इन परिवारों की सीमा पार न केवल रिश्तेदारी है बल्कि खेतीबाड़ी, कारोबार भी हैं यहां तक कि नेपाल की राजनीति में भी उनकी पैठ है। यह परिवार दोनों देश के बीच मधुर संबंध के हिमायती हैं।
सदर ब्लाक के धेन्सा नानकार निवासी बृजेंद्र नाथ शुक्ल वर्तमान हालात के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि भारत और नेपाल का विवाद पूरी तरह से चीन द्वारा प्रायोजित है, इसे दोनों देश के लोग समझते हैं। भारत का नेपाल के साथ रोटी-बेटी के संबंध है। उनका मानना है कि दोनों देश के जिम्मेदार लोग आपसी बातचीत से सुलझा लेंगे। बताया कि उनके चाचा शुभेंद्र नाथ शुक्ल पैसिया नेपाल मे बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। बृजेंद्र नाथ शुक्ल ने बताया कि फिलहाल तो हालात सामान्य हैं, लॉकडाउन के कारण मजदूरों के आवागमन पर रोक से कुछ प्रभाव जरूर पड़ा है। दोनों का मानना है कि भारत-नेपाल के बीच संबंध मधुर होने चाहिए। मायादेवी गाऊ पालिका सेमरौटी में रहने वाले राधेश्याम यादव की रिश्तेदारी बर्डपुर में है। वह कहते हैं कि दोनों देशों के बीच धार्मिक-आध्यात्मिक रिश्ते अनादि काल से हैं। नेेपाल के उपभोग की अधिकतर वस्तुएं भारत के रास्ते ही पहुंचती हैं। यह व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए। संतराम की रिश्तेदारी बांसी में है। वह कहते हैं कि नेपाल की समूची तराई क्षेत्र के 24 जिलों की बड़ी आबादी भारतीय बाजारों पर निर्भर है। यदि तनाव बढ़ा तो अत्यधिक संकट का सामना करना पड़ेगा। लॉकडाउन के कारण ही दोनों देशों में तमाम दंपति, बुजुर्ग और परिवार के लोग एक दूसरे से बिछड़े हुए हैं। दोनों देश की सरकारों को चाहिए कि संबंध मधुर बनें रहे इसी में सबकी भलाई है।