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बैठक में कटरिया बाबू गांव में नए कोटेदार का चयन हुआ

Tue, 18 Apr 2017 10:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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डुमरियागंज न्यू पीएचसी में सफाई करते विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कटरिया बाबू में मंगलवार को खुली बैठक आयोजित कर कोटेदार का चयन किया गया। कोटेदार चयन प्रक्रिया में तीन लोगों ने दावेदारी की थी। ग्रामीणों ने अनूप यादव को कोटेदार के रूप में चयनित किया। ग्राम पंचायत कटरिया बाबू में सरकारी राशन की दुकान करीब एक वर्ष से निरस्त चल रही थी। विभाग ने नई दुकान के चयन की घोषण की। विधानसभा चुनाव के कारण दुकान का चयन होने में विलंब हुआ। गांव के प्राथमिक स्कूल में आयोजित चयन प्रक्रिया गांव निवासी अनूप यादव, धर्मराज व रामधीरज ने दावेदारी किया।
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रजिस्टर में तीनों का नाम लिख ग्रामीणों से हस्ताक्षर व अगूंठा निशान लगाने के बाद कोटेदार का चयन किया गया। अनूप यादव के पक्ष में 300 लोगों ने हस्ताक्षर किया। इस दौरान चयन टीम के सदस्य ग्राम पंचायत अधिकारी अशोक कुमार, कानूनगो, पर्यवेक्षक और ग्राम प्रधान बुद्धू चौहान के साथ जैसराज, पटेश्वरी सिंह, रामकरन, इस्लाम, मोहन, सुनरा, दीनानाथ, जगदीश चौहान, पप्पू यादव, आनंद राम, ब्रजेश सिंह, पतिराम, रामदास, रामकरन, हरिराम, संवारे, मायावती, सुनरा, प्रीति, रम्मन, पार्वती, सल्लन, कृष्ण पाल, रामऔतार और जगेसर आदि मौजूद थे।
दो गांवों में हंगामा, एक में हुआ कोटेदार का चयन
मिश्रौलिया। बांसी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत तारा गुजरौलिया में मंगलवार को खुली बैठक में कोटे की दुकान के लिए चयन हुआ। तीन उम्मीदवारों के बीच सर्वाधिक 120 मत प्राप्त कर रामचंद्र के नाम पर दुकान आवंटन की सहमति बनी। वहीं, दो अन्य गांवों में हंगामे के चलते चयन प्रक्रिया स्थगित कर दी है। तारा गुजरौलिया में आयोजित खुली बैठक में रामचंद्र, टेढ़ाई और शैलेश के नामों का प्रस्ताव रखा गया। चयन प्रक्रिया के दौरान टेढ़ाई अनुपस्थित रहे। शैलेश को महज 14 वोट मिले, जबकि रामचंद्र ने 120 वोट पाकर ग्रामीणों की रजामंदी हासिल की।
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चयन प्रक्रिया के दौरान ग्राम पंचायत अध्यक्ष शिवकुमार, ग्राम पंचायत सचिव आशुतोष, एसएमआई दयासागर गुप्ता व समाज कल्याण अधिकारी रामनाथ मौजूद रहे। वहीं, मऊ उत्तरी और छतवा ग्राम पंचायतों में कोटे की दुकानों का चयन नहीं हो सका। चयन के दौरान आपसी सहमति न बन पाने और वोटिंग कराने की मांग को लेकर हंगामे के बाद इन गांवों में कोटे की दुकानों की चयन प्रक्रिया अग्रिम तारीख तक टाल दी गई।
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