सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर की पहचान महात्मा बुद्ध से है। दुनिया के तमाम देश बुद्ध के ज्ञान और शिक्षाओं का ही अनुसरण कर आगे बढ़ रहे हैं। मगर खुद बुद्ध की भूमि पर शिक्षा व्यवस्था का हाल बुरा है। नीति आयोग की ओर से चयनित देश के 101 अति पिछड़े जिलों में सिद्धार्थनगर शिक्षा के मामले में 98वें पायदान पर है। बॉटम के टॉप-20 जिलों में सिद्धार्थनगर शामिल है। घायल हंस को उपचार कर नया जीवन देने वाले बुद्ध के जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की भी सबसे खराब स्थिति है। स्वास्थ्य के मामले में जिले को 88वीं रैंकिंग मिली है। विभिन्न मापदंडों पर पड़ताल के बाद नीति आयोग ने यह रैकिंग देकर सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। अप्रैल से इसकी नियमित मॉनीटरिंग शुरू की गई है। अगली रिपोर्ट मई में जारी होगी।
देश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर नीति आयोग ने उन 101 जिलों को चुना है, जहां बुनियादी सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। इसमें सिद्धार्थनगर सहित प्रदेश के आठ जिले शामिल हैं। चयन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्तीय समावेश, कौशल विकास, बुनियादी सुविधाओं को आधार बनाया गया है। कृषि को छोड़कर हर क्षेत्र में हमारी स्थिति खराब है। सबसे बुरी दशा शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेश की है। इन तीनों क्षेत्रों में जिले को बॉटम लाइन के 20 जिलों में रखा गया है। जिले की ओवरऑल रैंकिंग 95ं है। यानी अति पिछड़े 101 जिलों में सिर्फ छह जिले ही हमसे खराब स्थिति में हैं।