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Siddharthnagar News: अधिक मुनाफा के फेर में मरीजों को बेच रहे कम असरदार दवा

Sat, 19 Oct 2024 02:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। बाजार में ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के बीच नकली यानी अमानक दवाइयां भी बिक रही हैं, वह भी महंगे ब्रांड के भाव। इस कारण इलाज कराने में खेत और गहने गिरवी रखकर जेब ढीली करने वाले मरीजों को बीमारी में पूरी राहत नहीं मिल रही है। इस कारण मरीज हैरान हो रहे हैं और खुद को गंभीर मरीज मानकर बड़े शहरों का भी चक्कर काट रहे हैं।
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ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयों के बीच कम तत्वों वाली दवाइयां भी बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही है। इसमें तत्व कम होने से धंधेबाजाें को सबसे सस्ती मिल मिल जाती है, लेकिन मरीज की बीमारी आराम बहुत कम मिलता है। ऐसी दवाइयों मेडिकल कॉलेज के आसपास के कुछ मेडिकल स्टोर या कुछ नामचीन निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर में बेची जा रही हैं। गलतफहमी ऐसी है कि ब्रांड, जेनेरिक और अमानक दवाइयाें पर लगभग कीमत एक सामान है, जिसमें ब्रांड की अपेक्षा जेनेरिक 40 से 50 प्रतिशत व अमानक दवा 50 से 60 प्रतिशत कम दाम में मिल रही है। एक ब्रांडेड कंपनी की एक दवा 6.5 रुपये टैबलेट है, जिसने दाम नहीं कम किया है। जेनेरिक में उस साल्ट की कीमत 3.30 रुपये है और वहीं दवा अमानक है तो 1 से 1.50 रुपये में मिल जाएगी, जबकि प्रचलन की ज्यादातर दवाइयों की कीमत एक समान लिखी जा रही है।
मरीजों का दर्द
शहर के परसा शाह आलम की अंजनी ने बताया कि बुखार होने पर उसने इलाज कराया था। डॉक्टर ने दवा लिखी थी, उसी दवा को मेडिकल स्टोर चलाने वाले रिश्तेदार ने देखा तो बताया कि ये दवाइयां कम तत्व वाली हैं। फिर दवा बदली गई। लोटन कस्बे के रहने वाले अजय ने भी यहीं समस्या बताई। उन्होंने बताया कि बिना बिल की दवा खरीदी थी, हालांकि कहासुनी के बाद उनकी दवा वापस हो गई।
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ग्रामीण परिवेश के मरीजों पर नजर
रिटायर फार्मासिस्ट ओपी चौधरी ने बताया कि दवा खेल आम आदमी के समझ में नहीं आ रहा है। इसी का फायदा उठाकर ठगी की जा रही है। जब डॉक्टर के इशारे पर कोई मरीज मेडिकल स्टोर पर जाता है, वह आंख मूंदकर उसकी दी हुई दवाइयों पर भरोसा कर लेता है। आयुर्वेदिक अस्पताल के रिटायर फार्मासिस्ट रमेश चंद्र द्विवेदी ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर ग्रामीण परिवेश के मरीजों से ठगी की जा रही है, क्योंकि वे दवा के खेल में कोई अंतर नहीं समझ पाते हैं। अमानक दवाइयों को बेचने वाले मेडिकल स्टोर वाले ग्राहकों को पहचानकर दवा बेचते हैं, क्योंकि वे अनुमान लगा लेते हैं कि कौन दवा की पहचान कर सकता है और कौन नहीं?

ऐसे समझिए अंतर
ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयां महंगी होती है, क्योंकि कंपनियां प्रमोशन पर खर्च करती हैं, जबकि बिना प्रमोशन वाली जेनेरिक दवाइयां फार्मूले के नाम से सस्ती बिकती है। अमानक दवाइयों को सीधे चिन्हित अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर भेजा जाता है, इसमें मनमानी कीमत भी लिख दी जाती है।
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रेट वही, खरीद में अंतर
दवा ब्रांडेड की कीमत जेनेरिक की कीमत
एल्थ्रोमाइसिन 500 एमजी, 132 50-60
राक्सीथ्रोमाइसिन 300 एमजी, 369 120 से 140
एजिथ्रोमाइसिन माइसिन 230 एमजी, 130 70 -80 रुपये
सिप्रोफ्लाक्सासीन 500 एमजी, 47 18-22 रुपये
दवा व्यवसाई बोले


ब्रांडेड और जेनेरिक की कीमत पर ही कम गुणवत्ता वाली अमानक दवाइयां भी हैं, जिसे गुमनाम कंपनियां बनाती हैं और वह जांच में पकड़ी भी जाती हैं। अच्छे मेडिकल स्टोर संचालक ऐसी दवाइयों को नहीं बेच रहे हैं, क्योंकि उनका काम तो लोगों के भरोसे पर चल रहा है।
जमीन सिद्दीकी, अध्यक्ष दवा विक्रेता संघ, सिद्धार्थनगर

अच्छे मेडिकल स्टोर वाले ज्यादा मुनाफा होने पर भी कम चर्चित कंपनियों की अमानक दवाइयां नहीं बेच रहे हैं। उन्होंने वर्षों से ग्राहकों का भरोसा जीता है। जो लोग ऐसी दवा बेच रहे हैं, वे इंसानियत नहीं कर रहे हैं। संघ की ओर से मेडिकल स्टोर संचालकों से कहा गया है कि अमानक दवा न बेचें।
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-सत्येंंद्र वीर सिंह भाटिया, अध्यक्ष दवा विक्रेता संघ, डुमरियागंज

कोट
जिले के मेडिकल स्टोर पर दवाइयों की जांच नियमित की जा रही है। सैंपल फेल पर कार्रवाई भी की जा रही है। यदि दवा में तत्व कम है तो अमानक हो जाती है।
नवीन, औषधि निरीक्षक, सिद्धार्थनगर
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