पक्के मकान की आस में जोगिया निवासी सुमित्रा देवी।
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सिद्धार्थनगर। छत की आस में अभी भी छप्पर में गुजर-बसर करने को बेबस हैं। चाहे भीषण बरसात हो या फिर कड़ी धूप या हांड़ कंपा देने वाली ठंड। झोपड़ी में रहना बेबसी है। मामला जोगिया गांव का है। यहां हरिजन बस्ती में अभी भी अधिकांश परिवार बिना छत के जिंदगी काट रहे हैं, मगर जिम्मेदार इनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है।
जहां से सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार होता है और लोगों योजना का लाभ दिया जाता है। वहीं जोगिया गांव में अधिकांश परिवार अभी आवास की आस में छप्पर में जिंदगी काट रहे हैं। मगर उन्हें अभी तक न तो प्रधानमंत्री आवास और न ही लोहिया आवास मिल पाया है। इन गरीबों तक अभी तक जिम्मेदारों की निगाह नहीं पहुुंची है। यह विभागीय जिम्मेदारों की उपेक्षा का शिकार हैं। गांव निवासी श्रीराम कहते हैं जब से गांव बसा तभी से छप्पर बनाकर रह रहे हैं। गांव के कई लोगों को आवास मिल चुका हैं, मगर हमे अभी तक आवास नहीं दिया गया हमेशा यहीं कहते हैं कि आवास मिल जाएगा, लेकिन अभी तक आवास नहीं मिला है।
जवाहर कहते हैं बहुत दिनों से झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं न तो लोहिया आवास मिला नहीं ही इंद्रा आवास। झोपड़ी में ही रहकर गुजर- बसर कर रहें हैं। अभी तक आवास नहीं मिला कि सिर पर छत हो जाएगा। सुमित्रा देवी व श्यामदेवी कहती हैं कई बार आवास के लिए नाम लिखकर ले गए लेकिन गांव कुछ लोगों को आवास मिल गया है। हम लोगों को अभी तक आवास नहीं मिला पाया है। ठंड, गर्मी, बरसात हर मौसम में इसी छप्पर में बच्चों को लेकर रहते हैं कोई भी जिम्मेदार समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। इस संबंध में बीडीओ विद्या मणि त्रिपाठी ने कहा कि अभी वह जल्द आए हैं। अगर सूची ने पात्र व्यक्तियों का नाम होगा तो जांच कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा।