सिद्धार्थनगर। सरकारी दर से कम रेट पर गेहूं की खरीद कारोबारी नहीं कर सकेंगे। अगर निर्धारित समर्थन मूल्य से कम पर खरीद करते हैं, और कोई शिकायत करता है तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही थोक और आढ़ती के भंडारण की सीमा निर्धारित की गई है। जांच में तय सीमा से अधिक भंडारण मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। जमाखोरी और बिचौलियों की ओर से किसानों के होने वाले शोषण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए हर वर्ष गेहूं और धान का समर्थन मूल्य निर्धारित करती है। उसी रेट पर समितियों से गेहूं की खरीद करती है। वहीं बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर समर्थन मूल्य से 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल कम दर पर खरीदते हैं, जिससे किसानों का बड़ा नुकसान होता है। इसके साथ ही जमाखोरी करने का कार्य करते हैं, जिससे एकाएक मूल्य में वृद्धि होती है, और उसका लाभ उठाते हैं। किसानों को वाजिब मूल्य मिले और उनका शोषण बंद हो। साथ ही जमाखोरी का धंधा खत्म हो इसके लिए सरकार के उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामले मंत्रालय ने आढ़तियों और थोक कारोबारियों के भंडारण की क्षमता निर्धारित कर दी है।
इसमें थोक कारोबारी 500 टन एवं आढ़ती जो खरीदने और बेचने का काम करते हैं, उसकी भंडारण क्षमता पांच टन निर्धारित है। जांच में इससे अधिक भंडारण मिलने पर जमाखोरी के मामले में केस दर्ज होगा। इसके साथ ही सरकार की ओर से निर्धारित समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कम खरीदते हुए मिलने पर केस दर्ज किया जाएगा। अधिकारी की जांच और शिकायत में ऐसा पाये जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में जिलाधिकारी ने दिशा-निर्देश दिया है। जिला विपणन अधिकारी की अगुवाई में जांच और कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय टीम भी करेगी जांच
भारत सरकार की टीम खरीद की हकीकत जाने के लिए जिले में दौरा करेगी। उसकी स्थिति के बारे में जानकारी लेगी। किसानों से भी बात करेगी। अगर कहीं गड़बड़ी मिलता है तो जिले की टीम के साथ कार्रवाई करेगी।
सरकार की ओर से तय किए गए समर्थन मूल्य से कम पर कोई भी अढ़ती और थोक कारोबारी किसानों से गेहूं नहीं खरीद करेगा। इससे कम पर खरीदते हुए पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भंडारण क्षमता निर्धारित है, उससे अधिक रखने पर जमाखोरी की श्रेणी में आएगा जो अपराध है। जांच में मामला सही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-गोरख नाथ, जिला विपणन अधिकारी