सिद्धार्थनगर। भारत ने मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए बासमती को छोड़कर अन्य प्रजाति के चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस प्रतिबंध के बाद नेपाल के गोदामों में चावल भंडारण पर मंथन हो रहा है। नेपाल सरकार की चिंता है कि आपूर्ति प्रणाली बाधित हो सकती है। मुख्य सचिव बैकुंठ आर्यल की अध्यक्षता में रविवार देर शाम केंद्रीय निगरानी समिति की बैठक में यह निर्णय किया गया कि खाद्यान्न की कीमत बढ़ सकती है और कमी भी हो सकती है । इससे लड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाने की आवश्यकता है।
नेपाल में भारत से बड़ी मात्रा में चावल आयात होता था। चीन के बाद भारत सबसे अधिक चावल पैदा करने वाला देश है। नेपाल में खपत होने वाले कुल चावल का लगभग 20 प्रतिशत आयात भारत के जरिए किया जाता था। नेपाल में लगभग 7 मिलियन मीट्रिक टन चावल की खपत होती है । 1.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक चावल की आपूर्ति आयात के माध्यम से की जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में नेपाल में 15 बिलियन से अधिक मूल्य का चावल आयात किया गया था। अब सरकार ने संबंधित मंत्रालयों को इस जोखिम का आकलन करने और आगे बढ़ने के लिए सतर्क कर दिया है।
उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने चावल निर्यात पर प्रतिबंध के बाजार पर असर को देखते हुए कदम उठाने का फैसला किया है। इसके लिए कृषि और पशुधन विकास मंत्रालय एवं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि भोजन की कोई कमी न हो।
सूत्रों के अनुसार निजी क्षेत्र की मदद से गोदामों में खाद्यान्न भंडारण और सरकारी गोदामों को यथासंभव भरा रखने का निर्णय लिया गया है। चावल स्टॉक का रिकॉर्ड रखने के लिए प्रौद्योगिकी और जनशक्ति दोनों का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है।
पहले टैक्स लगा, अब बंद हुआ निर्यात
इस वर्ष अच्छी बारिश नहीं होने के कारण कृषि योग्य भूमि में पूरा धान नहीं लगाया गया। यह निश्चित नहीं है कि जलवायु असंतुलन के दौर में रोपे गया धान कितना उत्पादन देगा। अधिकारियों का कहना है कि चावल निर्यात पर प्रतिबंध के बाद यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि इस तरह का प्रतिबंध नेपाल पर लागू न हो । भारत ने पिछले साल से चावल निर्यात पर 20 फीसदी तक टैक्स लगा दिया है।