सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सोमवार को जरूरत पर तत्काल इलाज नहीं मिलने के कारण दो नवजातों की मौत हो गई। एमसीएच विंग में एक महिला ने तीन बच्चे को जन्म दिया, जिसमें एक बच्चा मृत था और दो बच्चे जीवित थे। स्टॉफ नर्स ने आपस में चर्चा की कि दोनों बच्चों की स्थिति गंभीर है और एसएनसीयू भी बंद है। इतना सुनने के बाद परिजन उन बच्चों को लेकर तत्काल प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए, लेकिन वहां भी बच्चों के आईसीयू की सुविधा नहीं थी। इस कारण वे गाेरखपुर जा रहे थे, लेकिन दोनों मासूमों ने रास्ते में दम तोड़ दिया। मेडिकल कॉलेज में रात में एसएनसीयू में शार्ट सर्किट की आशंका से बच्चों को भर्ती करना बंद कर दिया गया है। डॉक्टर के अनुसार यदि एसएनसीयू में बच्चे तत्काल भर्ती हो जाते तो बचने की संभावना बढ़ जाती।
खेसरहा थाना क्षेत्र के कृष्ण गोपाल माधव ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने अपनी पत्नी संगीता को प्रसव पीड़ा होने पर एमसीएच विंग में भर्ती कराया और करीब सुबह 11 बजे तत्काल सामान्य प्रसव हो गया। तीन बच्चे पैदा हुए, जिसमें दो बच्चे जीवित थे। मेडिकल कॉलेज में एसएनसीयू बंद था तो वे एक प्राइवेट हॉस्पिटल गए, लेकिन उन्होंने भी कहीं और जाने की सलाह दी। दोनों मासूमों को लेकर गोरखपुर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यदि एसएनसीयू की सुविधा होती तो शायद उनके बच्चे बच जाते।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बताया था दो, पैदा हुए तीन बच्चे
कृष्ण गोपाल माधव ने बताया कि उनकी पत्नी की अल्ट्रासाउंड जांच में डॉक्टर ने बताया था कि जुड़वा बच्चे हैं, लेकिन तीन बच्चे पैदा हुए। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ के पास उन्होंने अपनी पत्नी की अल्ट्रासाउंड जांच कराई थी, लेकिन शुल्क जमा कराने के बावजूद भी डॉक्टर ने गलत रिपोर्ट दी थी। कृष्णगोपाल ने कहा कि वे अधिवक्ता हैं और निजी डाइग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू डॉ. ज्योत्सना द्विवेदी ने बताया कि महिला मरीज जैसे आई, वैसे ही प्रसव शुरू हो गया, इस कारण उन्होंने जांच रिपोर्ट नहीं देखी थी।
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गंभीर नवजातों को दूर ले जाना आसान नहीं
मेडिकल कॉलेज ही जिले में इकलौत अस्पताल है, जहां 24 घंटे सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा मिली है। इसी अस्पताल में पूरे जिले के गंभीर रूप से बीमार नवजात भर्ती होते रहे हैं। एमसीएच विंग में एसएनसीयू होने के कारण नवजातों को तत्काल भर्ती कर लिया जाता है। हर दिन 6 से 10 बच्चे भर्ती एसएनसीयू में भर्ती होते थे। डॉक्टरों में चर्चा है कि जो नवजात यहां से रेफर होंगे, गोरखपुर तक जाना उनके लिए खतरे से खाली नहीं होगा।