संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, कस्तूरबा इंटर कॉलेज व मुख्यमंंत्री मॉडल विद्यालय मिलने के बाद अब जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने की मांग होने लगी है।
गणित विषय से इंटर, बीएससी और एमएससी कर रहे छात्रों का कहना है कि इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने से छात्र-छात्राओं को बाहर जाना पड़ता है। यदि जनपद में ही इंजीनियरिंग कॉलेज हो तो यहां के छात्रों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में इंटरमीडिएट के बाद ही सीधे प्रवेश भी दिया जाता है।
जनपद में महाविद्यालयों के साथ ही मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय चल रहे हैं। विश्वविद्यालय में कई तकनीकी विषयों की भी मान्यता मिल गई है। इसके बाद जनपद में अब पढ़ाई के अवसर भी खुल गए हैं।
यहां तक कि अब जनपद में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण होने से बेटियों को जिले में नर्सिंग की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। ऐसे में अब अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। छात्रों से जब इस संबंध में वार्ता की गई तो उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने से जनपद के छात्रों को तकनीकी पढ़ाई के अवसर मिल सकेंगे।
जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने से हर वर्ष सैकड़ों छात्र-छात्रा बीटेक की पढ़ाई करने के लिए अन्य जिले व प्रदेश में जाते है। इन जगहों पर जाने से उन्हें परिवार से दूर होने के साथ ही आर्थिक समस्या से जूझना पड़ता है।