कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर। दहेज जैसी पुरानी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अब आवाजें सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि व्यक्तिगत फैसलों के रूप में सामने आने लगी हैं।
इसी कड़ी में नेपाल के मधेश प्रदेश की 26 वर्षीय डिप्टी स्पीकर रूबी कुमारी ठाकुर ने ऐलान किया है कि वह अब ऐसी किसी भी शादी में शामिल नहीं होंगी, जिसमें दहेज का लेन-देन होगा। उनके इस कदम ने भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में भी नई चर्चा छेड़ दी है।
रूबी ठाकुर ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा है कि दहेज लेना-देना ही नहीं बल्कि ऐसे आयोजनों में शामिल होना भी गलत है। उन्होंने लोगों से शादी के निमंत्रण पत्र में दहेज-फ्री होने का स्पष्ट उल्लेख करने की अपील की है। सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बहराइच और श्रावस्ती जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके वैवाहिक संबंध नेपाल से जुड़े हैं। ऐसे में इस फैसले को दोनों ओर के समाज से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लोग इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सख्त संदेश मान रहे हैं।
शादी के सीजन के बीच आए इस बयान के बाद युवाओं के बीच दहेज-फ्री शादी को लेकर चर्चा बढ़ी है। कुछ लोग इसे सकारात्मक पहल बता रहे हैं, वहीं कई का कहना है कि सामाजिक स्तर पर इसे लागू करना आसान नहीं होगा। स्थानीय युवक अंकित वर्मा ने कहा कि दहेज के खिलाफ इस तरह का खुला रुख जरूरी है, लेकिन समाज में इसे पूरी तरह खत्म करने में समय लगेगा। पूजा चौधरी ने कहा कि ऐसे फैसले से लड़कियों को अपनी बात रखने का साहस मिलता है।