सिद्धार्थनगर। बारिश में आंखों का संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आंख में समस्या लेकर पहुंचने वालों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में आंख लाल होने, दर्द, जलन, पानी आने और सूजन की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि उमस, नमी और संक्रमण फैलाने वाले वायरस-बैक्टीरिया की सक्रियता बढ़ने से यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है। समय पर उपचार नहीं कराने पर संक्रमण एक आंख से दूसरी आंख और परिवार के अन्य सदस्यों तक भी फैल सकता है। आने वाले मरीजों को दवा के साथ ही बचाव की सलाह दी जा रही है।
मौसम का असर कई प्रकार से सेहत पर प्रभाव डाल रहा है। जहां बुखार, जुकाम और अन्य समस्या से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। वहीं, दूसरी ओर आंख के रोगियों के संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आंख लाल होने, चुभन, पलकों में सूजन, तेज दर्द, धुंधला दिखाई देने और रोशनी से परेशानी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि आंख लाल होने को सामान्य समस्या समझकर मेडिकल स्टोर से मनमाने ढंग से आई ड्रॉप लेना नुकसानदायक हो सकता है। संक्रमण बढ़ने पर कॉर्निया भी प्रभावित हो सकता है, जिससे दृष्टि पर असर पड़ने का खतरा रहता है। इसलिए मरीजों की जांच करने के बाद दवा दी जा रही है। साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान गंदे पानी, दूषित हाथों, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और व्यक्तिगत स्वच्छता में लापरवाही के कारण कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) सहित अन्य नेत्र संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। अभी और बारिश बढ़ने के बाद यह दिक्कत बढ़ेगी।
बचाव ही बड़ा उपाय
आंखों को बार-बार हाथ से न छुएं। साफ तौलिया और रूमाल का ही प्रयोग करें तथा इन्हें किसी दूसरे के साथ साझा न करें। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें। बाहर से आने के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धोएं और आंखों की नियमित सफाई करें। यदि आंख लाल होने के साथ तेज दर्द, सूजन, धुंधला दिखना या दोनों आंखों में संक्रमण की शिकायत हो तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज से संक्रमण जल्दी नियंत्रित हो जाता है, जबकि लापरवाही करने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है और आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है।
-डॉ. संजय गुप्ता, नेत्र सर्जन, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज