सिद्धार्थनगर। युवा हर क्षेत्र में आगे निकल रहे है, लेकिन कृषि क्षेत्र होने के बाद भी जनपद में कृषि से स्नातक की कक्षाएं न होने से युवाओं में इसके प्रति रुझान कम हो रहा है। कृषि के क्षेत्र में तरक्की की राह तलाश रहीं बेटियों को इंटर के बाद स्नातक के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है जिससे युवाओं को कृषि की पढ़ाई करने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
जिले में स्नातक के लिए कृषि की कक्षाएं न चलने से इंटर पढ़कर छात्र-छात्राएं दूसरे जिले में स्नातक करने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में कृषि के प्रति युवाओं का रुझान कम हो रहा है। कृषि में तरक्की की राह आसान करने के लिए बेटियां भी कृषि से खेत-खलिहान की भाषा पढ़ रही है। छात्राओं का माने तो भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां पर कृषि के क्षेत्र में तरक्की पाने के लिए कई रास्ते है, लेकिन जिले में स्नातक की कक्षाएं न होने से घर से दूर जाने के कारण बेटियां कृषि के क्षेत्र में जाने के लिए कम रुचि ले रही है। स्नातक से कृषि की कक्षाएं चले तो कृषि से तरक्की की राह आसान कर सकेंगे।
भारत कृषि प्रधान देश है, जिले में सबसे अधिक किसान ही है। जिले से बाहर जाने के डर से कई छात्र-छात्राएं कृषि से पढ़ाई करना नहीं चाहते है।
-कुसुम, छात्रा
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भाइयों ने कृषि से पढ़ाई करके इस क्षेत्र में नाम रोशन किए है, इसमें क्षेत्र में रोजगार का अवसर है। जिले में स्नातक न होने से किसी अन्य शहर में जाकर आगे की पढ़ाई करेंगे।
-खुशी उपाध्याय, छात्रा
स्नातक के बाद विभिन्न सरकारी, निजी और सार्वजनिक संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों में रोजगार और व्यवसाय के लिए अच्छे रास्ते मिल रहे है जिससे तरक्की करने में आसानी होगी।
-सलमा बानो, छात्रा
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खेत-खतिहान, मिट्टी की उर्वरक शक्ति के अलावा गेहूं, चना, मटर, धान, सहित सभी फसलों और उसके मौसम चक्र को करीब से जानने और समझने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है।
-अर्चना, छात्रा