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- जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चार बेड अपडेट, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी 24 घंटे रहेंगे अलर्ट
- मामूली बुखार में भी भर्ती करके बच्चों की करेंगे जांच और इलाज
- पहले से संचालित व्यवस्था को और बनाएंगे बेहतर जिससे सीएचसी और पीएचसी पर ही हो सके बच्चों का बेहतर इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बारिश शुरू होने के बाद दिमागी बुखार होने का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि मच्छर के डंक मारने सहित अन्य कारणों से बच्चे इस बीमारी की गिरफ्त में आते हैं। इससे बचाव के लिए टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सीएचसी स्तर पर दिमागी बुखार पीड़ितों को भर्ती करने के लिए बने चार- चार बेड को और अपडेट किया जा रहा है। जाकि जब मरीजों की संख्या बढ़े तो यहीं पर इलाज हो सके और जिला अस्पताल भेजने की नौबत न आए। बेड के साथ ही 24 घंटे चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अलर्ट रहेंगे।
पूर्वांचल में कुछ साल पहले दिमागी बुखार इंसेफेलाइटिस से हर साल बड़ी संख्या में बच्चे बीमार होते थे। जिले में भी इस बीमार की गिरफ्त में बच्चे आते थे। बारिश का समय शुरू होने यानी जुलाई-नवंबर के दूसरे पखवाड़े तक बीमारी की चपेट में बच्चे आते हैं। जिला अस्पताल के पीआईसीयू में इस प्रकार के रोगियों की संख्या अधिक हो जाती थी। सबसे बड़ी समस्या की जानकारी न होने और समय पर इलाज न होने के कारण गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल पर बच्चे पहुंचते हैं। इससे इलाज में और परेशानी व गंभीर होने पर बीआरडी रेफर करना पड़ता है। प्राथमिक स्तर पर पीएचसी पर उनका इलाज हो जाए। इसके लिए जिले के सभी 14 सीएचसी पर चार-चार बेड को वेंटीलेटर युक्त वार्ड बनाया गया है। जहां बुखार से पीड़ित बच्चों का इलाज होता है।
दिमागी बुखार का समय आ रहा है। इसे देखते हुए सीएचसी में सुविधाएं और बेहतर होंगी। दवाओं के साथ-साथ जांच की सुविधा बेहतर की जाएगी। प्राथमिक स्टेज पर ही दिमागी बुखार का इलाज और जांच की जाएगी, जिससे गंभीर होने से पहले ही सेहत को सुधार जा सके। इसके अलावा पहले से ही संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़ा के तहत डोर टू डोर टीकाकरण किया जाएगा।
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सभी सीएचसी में चार बेड की व्यवस्था दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए किया गया। व्यवस्था को और अपडेट किया जा रहा है।
-डॉ. डीके चौधरी, सीएमओ