भनवापुर। स्थानीय ब्लॉक मुख्यालय का जर्जर पीएचसी भवन का ध्वस्तीकरण के बाद गांव के पंचायत भवन में छह माह से संचालित किया जा रहा है। डाॅक्टरों के अभाव में क्षेत्र की करीब पचास हजार के आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा एक फार्मासिस्ट पर है।
बहु प्रतीक्षित भनवापुर पीएचसी के जर्जर भवन को ध्वस्त कराकर नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। भवन के ध्वस्त होने के बाद पीएचसी गांव के पंचायत भवन के एक हाल व एक कमरे में संचालित किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन करीब 60 से 70 मरीज इलाज कराने आते है। वर्तमान में पड़ रही गर्मी के कारण डीहाईड्रेशन, लूज मोशन या एनिमिक मरीजों को ड्रिप लगाना पड़ता है। मगर जगह के अभाव में मरीजों को आठ किमी. दूर सीएचसी सिरसिया या 10 किमी. दूर डुमरियागंज जाना मजबूरी है।
पीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट परमात्मा प्रसाद चौधरी डाॅक्टरों के अभाव में मरीजों का इलाज करते हैं। पकड़ी नंदलाल गांव निवासी साकिर हुसैन व उनकी मां रैतुन डीहाईड्रेशन व लूज मोशन से परेशान इलाज के लिए पीएचसी भनवापुर पहुंचीं। जहां ड्रिप लगाया गया। भनवापुर गांव निवासी माया खून की कमी के कारण चक्कर खा कर गिर पड़ीं, जिन्हें पंचायत भवन में चल रही पीएचसी लाकर आयर सुक्रोज की दवा ड्रिप में चढ़ाई जा रही थी। फार्मासिस्ट परमात्मा प्रसाद चौधरी ने बताया कि इस समय ड्रिप लगाने की स्थिति वाले मरीज आते हैं, तो उन्हें जगह व बेड के अभाव में रेफर करना पड़ेगा।