संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष की संघ यात्रा के उपलक्ष्य में रविवार को लोहिया कला भवन में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने भारत की आजादी और समरस समाज के निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
विश्व को अंक ज्ञान, संगीत, शिक्षा और परिवार व्यवस्था का श्रेष्ठ मार्ग दिखाने वाला भारत लगभग एक हजार वर्ष तक पराधीन रहा। डॉ. हेडगेवार ने अपने विश्लेषण में पाया कि हिंदू समाज का आलस्य, समाज की असंगठित स्थिति, आपसी भेदभाव, सामूहिक चेतना की कमी इसके प्रमुख कारण थे। जाति, भाषा, ऊंचनीच के भेद को खत्म कर, समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए शाखा व्यवस्था का कार्य प्रारंभ किया गया। शाखाओं का विस्तार पूरे देश में हुआ और आज प्रत्येक जिले तथा सभी ब्लॉकों में संघ का कार्य पहुंच चुका है।
इस दौरान आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगा, लेकिन स्वयंसेवक निर्भीक हो देश, समाज के लिए कार्य करते रहे। संघ का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज को संगठित कर फिर राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाना है। शिक्षा क्षेत्र में संघ के विद्या भारती संगठन ने कार्य किया।
वर्तमान में एक लाख से अधिक शिक्षक 35 लाख छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। संघ का स्वयंसेवक किसी वेतन, पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज सेवा की भावना से कार्य करता है। पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, स्वच्छता, कानून पालन, मातृभाषा, आधुनिक ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करने के लिए समाज को प्रेरित करता है।
अतिथि देवो भव और मातृभूमि सर्वोपरि हमारी संस्कृति रही है। अशोक बोरा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विभाग कार्यवाह शिवमूर्ति, विभाग संघचालक रामचंद्र मुंशी रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला प्रचार प्रमुख अभय सिंह ने किया और प्रस्ताविकी प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. अरविंद सिंह ने रखी।
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