फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: खाद तस्करी पर हाईटेक घेरा, बिक्री पर कैमरों का पहरा

Fri, 08 May 2026 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। जनपद में खाद के लिए हर साल मचने वाले हाहाकार को रोकने के लिए प्रशासन ने मास्टर प्लान तैयार किया है। बाॅर्डर से तस्करी के जरिये नेपाल जाने वाली खाद पर कड़ी निगरानी की जाएगी।
विज्ञापन

एक-एक बोरी और किसानों पर नजर रखने की कवायद शुरू की है। इसके लिए 108 सहकारी समिति और करीब एक हजार निजी दुकानों को सीसीटीवी कैमरे से लैस किया जाएगा। सीजन में होने वाली बिक्री की तहसील स्तर से निगरानी होगी।
वहीं, नेपाल से लगने वाली 68 किलोमीटर सीमा पर सुरक्षाकर्मी, राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेगी। इससे तस्करी को रोका जा सके और जिले में हालात नियंत्रण में रहे। क्योंकि, रबी सीजन में एक-एक बोरी के लिए किसान परेशान थे और बाॅर्डर पर बड़ी खेप की बरामदगी होती रही। इस चुनौती से निपटने के लिए जिलाधिकारी ने कार्ययोजना बनाई है।
विज्ञापन

जनपद नेपाल बाॅर्डर से लगा हुआ है और जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। सीमा खुली होने के कारण तस्कर समय-समय पर सिर उठाते हैं। जिस सामान की मांग बढ़ती है, उसे बाॅर्डर पार करने का काम शुरू हो जाता है। इसमें अन्य सामानों की तस्करी से तो बहुत असर नहीं पड़ता है, लेकिन खाद की तस्करी बढ़ती है तो आफत आ जाती है। एक तरफ एक- एक बोरी के लिए किसान समितियों पर भोर से देर शाम तक जूझते हैं। निजी दुकानों पर अधिक कीमत और जबरिया जिंक दिया जाता है, इसके बाद भी खाद नहीं मिल पाती है।
वहीं, हो हल्ला शुरू होने के बाद बार्डर पर सख्ती बढ़ती है तो हर दिन बड़ी मात्रा में खाद बरामद होती है। जैसा की रबर की सीजन में देखने को मिला। बार्डर के कई इलाकों में निजी दुकानों पर हजारों बोरी खाद डंप मिली।
वहीं, पिकअप और ई-रिक्शा और टेंपो से खेप नेपाल पहुंचाने की कोशिश में भी तस्कर पकड़े गए। यह तो सामने दिखने वाले मामले होते हैं, वहीं, न जाने कितनी खाद रात के अंधेरे में नेपाल चली जाती है। खरीफ का सीजन सिर पर है। ऐसे में रबी के सीजन जैसे हालात न हो और किल्लत की गूंज शासन तक न पहुंचे, इसके लिए प्रशासन की ओर से अभी से मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। इस बार एक-एक बोरी की निगरानी होगी। इसमें बिक्री की आडिट तो होगी ही, इसके साथ ही दुकान की लाइव मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
इसके लिए जिले में संचालित होने वाली 108 सहकारी समिति और लगभग एक हजार निजी दुकानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की कवायद शुरू हुई है। कैमरे से दुकानों की सीधे निगरानी होगी। दुकान पर कब से कब तक बिक्री हुई और किसे कितनी बोरी वितरण हुआ है। इसके साथ ही बाॅर्डर पर विशेष नजर रखी जाएगी। हर पल निगरानी होगी, जिससे बाॅर्डर पर खाद न जाने पाए। अगर नेपाल में तस्करी रुक गई तो काफी हद तक राहत मिलेगी।
आवंटित होती है इतनी खाद : विभाग से जुड़े आंकड़ाें के मुताबिक जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की खेती होती है। रबी के सीजन इस रकबे के लिए 10687 मीट्रिक टन डीएपी, 6211 मीट्रिक टन एनपीके, एमओपी 1381 मीट्रिक, सुपर फास्फेट 20899 मीट्रिक टन जबकि 47 हजार मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य था। कमी होने के बाद और खाद की डिमांड की गई। लक्ष्य से अधिक खाद की आपूर्ति हुई, तब जाकर किसानों को राहत मिल पाया था। दोनों सीजन में लक्ष्य घटता और बढ़ता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें