सिद्धार्थनगर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने के बाद प्रधान को ही प्रशासक बनाए जाने के सरकार के फैसले पर कोर्ट की टिप्पणी के बाद असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हाईकोर्ट ने सरकार से 13 जुलाई को सुनवाई की तिथि तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने को कहा है। ऐसे में प्रशासक बने प्रधानों के साथ ही विकास कार्य प्रभावित होने से ग्रामीणों में भी ऊहापोह है। विभाग की मानें तो वर्तमान में सभी विकास कार्यों को कराने और भुगतान के लिए डीपीआरओ के माध्यम से डीएम से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया चल रही है। खातों का संचालन पूर्ववत है, हालांकि मुहर प्रधान की जगह प्रशासक के लग रहे हैं।
शासन के निर्देश पर जिले के सभी 14 ब्लॉकों के 1136 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 1130 ग्राम पंचायतों में प्रधान को प्रशासक बनाया गया है। वहीं, जिन छह ग्राम पंचायतों में विभिन्न कारणों से तीन सदस्यीय कमेटी गठित थी, वहां पर संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशासक का दायित्व सौंपा गया है। जबकि पूर्व में कार्यकाल समाप्त होने के बाद और चुनाव में देरी होने पर ग्राम प्रधानों का दायित्व निर्वहन करने के लिए एडीओ या वीडीओ को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। प्रशासकों की नियुक्ति पर दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने 13 जुलाई तक सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि असंवैधानिक हो चुके नियमों के तहत ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी से प्रधानों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। प्रधानों समेत अन्य लोगों को भी कोर्ट की अगली सुनवाई की तिथि 13 जुलाई को आने वाले निर्णय के प्रति बेसब्री बढ़ गई है।
शासन के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों में प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए गए है। आगे भी शासन से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा।
- वीपी झा, डीपीआरओ