सिद्धार्थनगर। आसमान छू रहा तापमान न सिर्फ बुखार-जुकाम का शिकार बना रहा है, बल्कि आंख पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। लू के कारण आंख का पानी सूख रहा है और आंख लाल हो रही है। ऐसे में लापरवाही करना आंख पर असर डाल सकता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में प्रतिदिन 20 से 25 रोगी पहुंच रहे हैं, जिन्हें दवा देने के साथ मौसम से बचाव की सलाह दे रहे हैं।
पिछले कई दिन से जनपद लू के प्रकोप की चपेट में है। तापमान कई दिनों से 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। कमोबेश रात और दिन दोनों एक जैसे हालात बने हुए हैं। इसी गर्मी का असर अब केवल शरीर ही नहीं बल्कि आंखों पर भी पड़ने लगा है। चिलचिलाती धूप, गर्म हवाएं और धूल-गुब्बार लोगों की आंखों में जलन, दर्द, लाली और सूजन जैसी समस्याएं बढ़ा रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ओपीडी की बात करें तो नियमित 20 से 25 से रोगी इन समस्याओं से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं और डॉक्टर के समक्ष परेशानी जाहिर कर रहे हैं। वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञ ड्रॉप देने के साथ ही नियमित ठंडे पानी से आंख धुलने की सलाह दे रहे हैं, जैसा की ओपीडी में देखने को मिला है।
कमोबेश यही हाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों का भी है। यहां आंख की समस्या से जुड़े रोगी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ के अनुसार तेज धूप और गर्म हवा के सीधे संपर्क में आने से आंखों की नमी कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई, एलर्जी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कई लोगों में सिरदर्द, चक्कर, बुखार और उल्टी-दस्त के साथ आंखों में जलन और धुंधलापन की शिकायत भी सामने आ रही है। लगातार मोबाइल और स्क्रीन देखने वाले लोगों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो रही है। दोपहर के समय कड़ी धूप में निकलने से बचें, बाहर निकलते समय धूप का चश्मा पहनें और आंखों को बार-बार ठंडे पानी से धोते रहें। लापरवाही बरतने पर आंखों की रोशनी तक प्रभावित हो सकती है।
नेत्र सर्जन डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में आंख की समस्या से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, यह लगातार तापमान में वृद्धि और कड़ी धूप में निकलने के कारण हो रहा है। मरीजों को दवा देने के साथ ही आंख की समय- समय पर धुलने और बिना डॉक्टर के सलाह पर ही दवा न लेने के लिए कहा जा रहा है। धूप से बचने की सलाह दी जा रही है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि अस्पताल में मौसम से जुड़ी बीमारी की दवा और गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पूरी व्यवस्था की गई है।