बस्ती। पुलिस के लिए गले की हड्डी बने पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी केस में मंगलवार को फिर सुनवाई है। व्यापारी के पुत्र के अपहरण के मामले में 22 वर्ष से गिरफ्तारी कर पाने में नाकाम रहने के बाद न्यायालय ने उसकी संपत्तियों की कुर्की का आदेश पुलिस को दिया है। इसके अनुपालन के लिए पुलिस एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है।
जानकारी के अनुसार, 20 जनवरी को पिछली तारीख पर केस में कोतवाल चंदन कुमार की तरफ से न्यायालय में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरमणि त्रिपाठी निवासी 19 ए हुमायुपुर दक्षिण थाना कोतवाली, जिला गोरखपुर के समस्त चल-अचल संपत्ति का पता कर कुर्की करने का दो दिसंबर को आदेश जारी किया गया था। इसके अनुपालन में जनपद गोरखपुर, महराजगंज एवं लखनऊ से एकत्रित सूचना के अनुसार आरोपी अमरमणि त्रिपाठी की कोई चल संपत्ति नहीं पाई गई।
महराजगंज व लखनऊ में दो अचल संपत्ति पाई गई हैं। दोनों संपत्तियां डीएम बस्ती के अधिकार क्षेत्र से बाहर की हैं। ऐसे में विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए)/ सप्तम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने डीएम बस्ती को निर्देश दिए थे कि वह स्थिति स्पष्ट करें कि अमरमणि त्रिपाठी की बस्ती जनपद में कोई चल या अचल संपत्ति है या नहीं। ताकि महराजगंज और लखनऊ में आरोपी की संपत्ति कुर्क करने के संबंध में प्रमुख सचिव गृह को निर्देशित किया जा सके।
यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया था। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह तत्कालीन मंत्री अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी है। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस मामले में अंतिम सुनवाई आठ दिसंबर को की गई थी जिसमें कोतवाली पुलिस को कुर्की करके 20 दिसंबर को सुनवाई की तारीख तय की गई थी। 20 दिसंबर को सुनवाई नहीं हो सकी और 10 जनवरी की तारीख मुकर्रर की गई थी। जिस पर पुलिस ने 10 दिन की मोहलत मांगी थी।