ब्लॉक प्रमुख चुनाव में जिले के आठ ब्लॉकों में सपा की पौ बारह रही। सत्ताधारी दल के आगे विरोधी भी नतमस्तक हो गए। नामांकन प्रक्रिया के बाद जिले के कुल 14 में से 8 ब्लॉकों में सपा प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है।
इन ब्लाकों में सिर्फ एक-एक उम्मीदवारों ने ही नामांकन किया। विरोधी दलों को तमाम कोशिशों के बाद भी कई ब्लाकों में प्रत्याशी नहीं मिले।
जिला पंचायत अध्यक्ष के बाद 8 ब्लाकों में निर्विरोध प्रमुख चुने से सपाई खेमा जहां खुशी में डूब गया है, वहीं विरोधी अब समय के इंतजार में चुप्पी साध गए हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य के नतीजे आने के बाद से ही ब्लाक प्रमुख चुनाव की सरगर्मी चरम पर थी। अनुकूल आरक्षण पर अमूमन हर ब्लाक में दो-तीन दावेदार बने हुए थे।
जोड़-तोड़ के साथ समीकरण साधने का दौर भी तब से ही शुरू हो गया था। सपा ने प्रत्याशियों की सूची जारी की तो कई धुरंधर बैकफुट पर आ गए।
आधे ब्लाकों में तभी तस्वीर साफ हो गई थी। रही-सही कसर सत्ता की हनक ने पूरी कर दी। हालांकि इसके बावजूद कुछ ब्लॉकों में दावेदारों ने बगावती तेवर अपनाते हुए नामांकन पत्र खरीद लिया था।
नामांकन तिथि की सुबह तक उनकी ओर से मैदान में डटे रहने के दावे किए जा रहे थे। तमाम औपचारिकताएं भी पूरी करने में लगे रहे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका मन-मिजाज बदल गया।
इस बदलाव के पीछे तर्क चाहे जो भी दे रहे हों, मगर हकीकत किसी से छिपी नहीं है। सियासी रणनीतिकारों की मानें तो प्रदेश के कई जिलों में सत्ता के खिलाफ चुनाव लडने के हश्र ने विरोधियों के पांव उखाड़ दिए। अब उन्हें समय का इंतजार है। सब कुछ अनुकूल होने पर दांव खेलने के मन के साथ चुप्पी साध कर बैठ गए हैं।