सिद्धार्थनगर। विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और पूर्व सांसद मो.मुकीम की सियासी प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। अस्सी के दशक से दोनों ही इटवा विधानसभा क्षेत्र से एक-दूसरे के खिलाफ पूरी दमदारी से लड़ते आ रहे हैं। वर्षों से वहां का चुनाव इन्हीं दोनों के बीच सिमटता रहा है। इस बीच माता प्रसाद छह बार विधायक बने तो मो. मुकीम को भी दो बार जीत मिली है। लोकसभा चुनाव भी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ चुके हैं। सियासत की थोड़ी समझ रखने वाले भी यह भली-भांति जानते हैं कि माता प्रसाद और मो. मुकीम इटवा की राजनीति के दो विपरीत ध्रुव हैं। मगर गुरुवार को तस्वीर बदली हुई थी।
हमेशा एक-दूसरे से दूर भागने वाले दो धुर विरोधी एक साथ थे। सिर्फ साथ ही नहीं थे, बल्कि कांग्रेस नेता मो. मुकीम सपा प्रत्याशी माता प्रसाद के प्रस्तावक भी बने। खुद अपने हाथों से उनका नामांकन पत्र जमा किया। हर किसी के लिए यह चर्चा का विषय बना रहा। कोई इसे गठबंधन धर्म की मजबूरी बता रहा था तो कोई सियासी पैंतरा। बरहाल, इस तस्वीर के पीछे की हकीकत चाहे जो भी हो, मगर जिले के राजनीतिक परिदृश्य में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोग धुर विरोधियों के एक होने के किस्से कहकर चुनावी माहौल को गर्म कर रहे हैं।