सिद्धार्थनगर। हरितालिका तीज पर सोमवार को सुहागिनों ने निर्जला व्रत रख अखंड सौभाग्यवती की कामना कर सूर्यदेव को जल अर्पित किया। शिव मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। प्रथम पूज्य गणेश की वंदना कर शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक किया। बेलपत्र फूल फूल मेवा चढ़ाया।
मां पार्वती को सोलह शृंगार की वस्तुओं को अर्पित कर अखंड सौभाग्यवती के लिए प्रार्थना की। पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही मंदिरों मे व्रती महिलाओं की भारी भीड़ रही। नगर पंचायत के कारण माता श्रीराधा कृष्ण व श्रीराम जानकी मंदिर में पुजारी टिल्लू शर्मा ने हरितालिका तीज व्रत की महिमा की कथा सुनाई। कहा भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने हरितालिका तीज व्रत रखा और उनकी मनोकामना पूरी हुई तभी से यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हरितालिका तीज निर्जला व्रत का पालन करने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है तथा पति की उम्र दीर्घायु होती है। पूजा के दौरान प्रियंका शर्मा, कुमुद वर्मा, शैल सोनी, प्रीति जायसवाल आरती मद्देशिया आदि मौजूद रहीं।
पुराणों में महात्म्य
स्वामी अच्युत रामानुजाचार्य के अनुसार भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस व्रत को सुहागन तथा कुंवारी कन्याओं को भी करने का विधान है। पुराणों के माध्यम से सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को वर के रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। उनके पिता माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। परंतु पार्वती मन में भगवान शिव को पति के रूप में वरण किया। पिता के कठोर निर्णय को देखकर पार्वती की सखियों ने हरण करके जंगल में ले जा कर शिव को पति के रूप में पाने के लिए भादो शुक्ल पक्ष तीज के दिन तप कराया। इसलिए इस व्रत को हरितालिका कहते हैं।