वैसे तो विकास के कई मुद्दे पर डुमरियागंज फिसड्डी साबित हो रहा है। बात आधी आबादी की कि जाए तो उनकी स्थिति और भी चिंतनीय है। स्वास्थ्य मुद्दे पर डुमरियागंज की आधी आबादी पूरी तरह से उपेक्षित है।
तहसील क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर एक भी महिला चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। इसके चलते यहां महिलाओं का इलाज प्राइवेट व्यवस्था पर टिका है।
प्रसव व अन्य किसी गंभीर समस्या होने पर महिलाओं को बस्ती व अन्य दूसरे स्थानों पर ले जाना पड़ता है। वहीं सरकारी अस्पतालों पर महिला डॉक्टर की तैनाती न होने से क्षेत्र में प्राइवेट रूप से संचालित की जा रही चिकित्सा केन्द्रों पर शोषण किया जा रहा है।
कइयों को तो इलाज के अभाव व प्राइवेट चिकित्सकों की लापरवाही से तमाम परेशानियों भी झेलनी पड़ी है। महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधित इस समस्या को लेकर विभाग, प्रशासन व जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है, जिससे महिलाओं में रोष है। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी श्रीवास्तव ने बताया कि महिला चिकित्सक की कमी पूरे जिले में है। ऊपर लिखा-पढ़ी की जा रही है। उपलब्ध होने के बाद ही तैनाती संभव हो पाएगी।