- लड़कियों का अपरहण करके बेचने के आरोपी द्वारा दिए गए बयान पर ढेबरुआ थाने पर पहुंची थी
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसियापुर। गुजरात पुलिस एक नेपाली अपहरणकर्ता के चक्कर में पूरा दिन ढेबरुआ थाना क्षेत्र में घूमती रही और थकहार कर वापस गुजरात लौट गई। अपहरणकर्ता पूर्व में किए गए फर्जी अपहरण की घटनाओं को बताकर गुजरात पुलिस की टीम को गोंडा, बलरामपुर होते हुए ढेबरुआ भी ले जाया आया। जांच में उसके द्वारा बताया गया पूरा मामला फर्जी निकला।
जानकारी के अनुसार गुजरात के बलसाड़ जिले के डुंगरा थाना क्षेत्र के करवड में एक निर्माणाधीन विल्डिंग में नेपाल के कपिलवस्तु जिले के कोपवा का रहने वाला लेखे खनाल उर्फ रमेश नेपाली सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था। वहीं विल्डिंग निर्माण में मजदूरी करने वाले एक परिवार में रहने वाली आठ वर्षीय बालिका का रमेश ने गत आठ फरवरी को अपहरण कर लिया। परिजनों ने डुंगरा पुलिस में बालिका के अपहरण की नामजद तहरीर दिया। पुलिस ने अपहरणकर्ता रमेश व बालिका की तलाश सोशल मीडिया व अन्य स्तर से शुरू किया।10 फरवरी को मध्यप्रदेश के खंडवा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने रमेश और बालिका को पकड़ लिया। आरपीएफ ने इसकी सूचना डुंगरा पुलिस को दिया। पुलिस ने जब उससे कड़ाई से पूछताछ किया तो उसने बताया कि वह छोटी-छोटी बच्चियों का अपहरण कर उन्हें नेपाल में बेंच देता है और इसके पहले वह गोंडा, बलरामपुर व बढ़नी में भी बालिकाओं का अपहरण कर नेपाल में बेंच चुका है। उसकी बातों से गुजरात पुलिस हरकत में आई और डुंगरा पुलिस के एसआई एके पाटिल के नेतृत्व में एक पुलिस टीम को मामले की जांच के लिए यूपी में भेजा। शुक्रवार को गुजरात पुलिस की टीम ढेबरुआ थाने में पहुंची। लेकिन यहां उसके अपहरण संबंधी सभी खुलासे झूठ साबित हुए। ढेबरुआ पुलिस के पूछताछ में वह सभी अपहरण से मना कर दिया। मजबूरन गुजरात पुलिस को वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में ढेबरुआ एसएचओ छत्रपाल सिंह ने बताया कि गुजरात पुलिस की टीम को जांच में पूरी मदद किया गया। लेकिन जांच के दौरान अपहरणकर्ता झूठी कहानी बनाता रहा।जिस कारण गुजरात पुलिस वापस लौट गई।